चेतना की नींव का निर्माण (उत्तरार्ध)
प्रकाशित अद्यतन
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(पिछली बार से जारी)
★चेतना की नींव का निर्माण: मध्य स्तर
तो, आरंभिक तीन बिंदुओं पर काम शुरू कर दिया हो, तो अब उन्हें वैसे ही जारी रखते हुए, साथ-साथ मध्य स्तर के चरण में प्रवेश करो।
इसका क्या अर्थ है, तो स्वयं जीवन के प्रकाश से निकलने वाली प्रकाशमय चेतना को, प्रयासपूर्वक अपने विचारों, शब्दों और कर्मों में प्रकट करना।
ख़ासकर विचार वचन और कर्म का मूल होते हैं, इसलिए जो विचार सोचने की कोशिश किए बिना आए……, दिमाग़ से अस्पष्ट रूप से गुज़रने वाले तरह-तरह के विचार-समूहों को भी अच्छी तरह देखो, और अगर प्रकट हुआ विचार प्रकाशमय चेतना के विरुद्ध हो, उससे दूर हो, तो प्रकाश का कोतोदामा उच्चारकर, उन असत्य विचारों को प्रकाश की चेतना से ओवरराइट करके सहेजो।
दिव्यता पर आधारित ऐसी चेतना को जान-बूझकर लगातार प्रकट करते रहने से, हर मनुष्य ब्रह्मांड को रचने वाली शक्ति को याद करता जा सकता है।
यह तो, पसंद हो या न हो, कभी न कभी हर किसी को करनी ही है, यह वह रास्ता है जिससे गुज़रना ही है।
इस चरण से बचकर असेंशन का कोई रास्ता नहीं, इसलिए यही मानकर मन पक्का करो, और ईश्वर की चेतना को भौतिक शरीर की चेतना में स्थिर कर सको, इसके लिए प्रकाशमय चेतना से जियो।

★ज़रूर कर सकोगे, इसलिए करके देखो
इस तरह उजले, सहज मन से हर दिन बिताते रहो, तो पता चले बिना तुम सच में बदलने लगते हो।
प्रयासपूर्वक प्रकाशमय चेतना प्रकट करने की कोशिश न भी करो, तो स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ने वाली चेतना, गहरे प्रेम और कृतज्ञता से भरी चेतना बनने लगती है।
उस अवस्था में जीवन का प्रकाश आकाश और धरती को भेदकर सीधा जुड़ जाता है, इसलिए तुम हमेशा उजले मन में रह सकते हो, यही बात है।
हमारी बातों पर भोलेपन की हद तक लगातार अमल करते रहो, तो कोई भी व्यक्ति ईश्वर की चेतना को भौतिक मन में प्रकट कर सकता है।
सब मूल रूप से दिव्य अस्तित्व हैं, इसलिए करने पर न हो सके, ऐसा कुछ नहीं।
उसे असंभव बना रहे थे दिव्यता को नकारने वाले आदत के विचार, “यह हो ही नहीं सकता, मेरे बस का नहीं”।
इसीलिए कहता हूँ कि धीमी, सहज साँस के साथ प्रकाशमय चेतना सोचो, और सार्वभौमिक सत्य के कोतोदामा से मन को ओवरराइट करके सहेजते जाओ।
मन के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए ऐसे सार्वभौमिक सत्य के आचरण को जारी रखने के सिवा कोई रास्ता नहीं, इसलिए मन पक्का करके करके देखो।
तुम ज़रूर अपने भाग्य को सही दिशा दे सकने वाले व्यक्ति बनोगे।
बल्कि, तुम्हारे पास शुरू से ही ऐसी शक्ति थी, बस तुम उसे पूरी तरह भूल गए थे। (समाप्त)






