कविताएँ
भीतर का एकीकरण
प्रकाशित: अद्यतन: “मैं कभी किसी पर फ़ैसला नहीं सुनाता, कभी किसी को दोष नहीं देता, कभी किसी को नीचा नहीं देखता, कभी किसी से भेदभाव नहीं करता, कभी किसी की आलोचना नहीं करता। इसलिए मैं सब लोगों को…
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भीतर का एकीकरण
प्रकाशित: अद्यतन: “मैं कभी किसी पर फ़ैसला नहीं सुनाता, कभी किसी को दोष नहीं देता, कभी किसी को नीचा नहीं देखता, कभी किसी से भेदभाव नहीं करता, कभी किसी की आलोचना नहीं करता। इसलिए मैं सब लोगों को…
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गहरी श्वास जो सिखाती है
प्रकाशित: अद्यतन: सुबह जागने के क्षण लेटी हुई अवस्था में मन के भीतर धीरे-धीरे पवित्रता की वाक् बोलते हुए सिकोड़े हुए होंठों से ज़ोर से जितना हो सके लंबा साँस बाहर छोड़ते जाओ छोड़ते, छोड़ते, पूरा छोड़कर फिर…