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तारों के साथ संवाद के युग का द्वार खोलने के लिए

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

कविताएँ

भीतर का एकीकरण

प्रकाशित अद्यतन

“मैं कभी किसी पर फ़ैसला नहीं सुनाता,
कभी किसी को दोष नहीं देता,
कभी किसी को नीचा नहीं देखता,
कभी किसी से भेदभाव नहीं करता,
कभी किसी की आलोचना नहीं करता।

इसलिए मैं सब लोगों को क्षमा करता हूँ,
सब लोगों को पवित्र अस्तित्व मानता हूँ,
सब लोगों को गले लगाता हूँ,
सब लोगों को स्वीकार करता हूँ,
सब लोगों के प्रति कृतज्ञ रहता हूँ,
सब लोगों से प्रेम करता चलता हूँ।”

उसके लिए पहले,
अपनी पूरी तस्वीर को पवित्रता की आँख से ऊपर से देखता हूँ,
अवचेतन और जाग्रत मन को पूरा का पूरा गले लगाता हूँ,
अपने हर रूप को स्वीकार करता हूँ,
अपने हर रूप के प्रति कृतज्ञ रहता हूँ,
अपने हर रूप से प्रेम करता चलता हूँ।

तब
भौतिक शरीर तक सीमित विचार और सूक्ष्म देह की चेतना,
भीतर के असली रूप, दिव्य स्व में घुल जाते हैं,
आत्म-देह की चेतना दिव्य-देह की चेतना तक ऊपर उठती है,
दिव्य-देह की चेतना जीवन के मूल स्रोत तक ऊपर उठती है,
साथ ही संरक्षक आत्मा की चेतना और संरक्षक देवता की चेतना भी,
मेरे दिव्य स्व के भीतर एक हो जाती हैं,
और सात मनों का एकीकरण पूरा होता है।

इस तरह
भीतर का एकीकरण पूरा कर चुका मैं,
मूल स्वरूप वाला, आत्मा के ठहरने वाला मनुष्य बनकर
ईश्वर के रूप में जीवन की राह पर चलता हूँ।

 

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

इस ब्लॉग के संदेश, विषय के अनुसार एक पुस्तक-श्रृंखला में फिर से संजोए गए हैं।
यह श्रृंखला एक-एक खंड करके प्रकाशित की जाएगी।

Angelusbell

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वीडियो एक-एक करके जारी किए जाएँगे।

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