संभावनाओं के ब्रह्मांड की ओर
प्रकाशित अद्यतन

ब्रह्मांड में अनंत संभावनाएँ समाई हैं
यहाँ ब्रह्मांड का अर्थ पाँच इंद्रियों से महसूस होने वाला ब्रह्मांड नहीं
मन से भी आगे की गहराई में फैला बहु-आयामी ब्रह्मांड
उसे भीतर का ब्रह्मांड कहते हैं
वही सच्चा ब्रह्मांड है
बहु-आयामी ब्रह्मांड की पूरी तस्वीर अभी खोली नहीं गई
उसका कारण है
इस संसार के शब्दों में, यानी वचन की शाखाओं-पत्तों में, उसे व्यक्त करने वाले शब्द नहीं हैं
और पृथ्वी के मनुष्यों की चेतना इतनी नहीं फैली कि अनगिनत विशाल स्पंदन-क्षेत्रों को अपने भीतर समा सके

ब्रह्मांड की संरचना पूरी तरह फ़्रैक्टल है
उसकी मूल संरचना है मानसिकता और भौतिकता
जीवन-स्पंदन की गहराई में उनके वास्तविक रूप को खोजना
ब्रह्मांड के मूल को खोजने का मार्ग बनता है
सब अभिव्यक्तियों के मूल स्रोत, यानी ब्रह्मांड के मूल में लौटना ही
आगे मानवता के चलने का मार्ग है
मानवता उस मूल के आदर्श को आपस में बाँटकर
अपने-अपने ग्रह पर प्रकट करने वाला अस्तित्व है
समष्टि के सामंजस्य की उपेक्षा करके व्यक्ति की स्वतंत्रता का नारा लगाना
अभी भी अहं की आवाज़ है
अपने मन में अच्छी तरह झाँककर
ब्रह्मांड के एक अंश के रूप में अपने बारे में फिर से सोचो
उसी के आगे संभावनाओं का ब्रह्मांड फैला है





