तारों के बच्चों के नाम ~ पृथ्वी की नियति को फिर से केवल तुम ही रच सकते हो
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शायद तुम आमतौर पर अपने बारे में यही सोचते हो कि तुम छोटे-से, साधारण प्राणी हो, जो कहीं भी मिल जाते हैं।
पर असली तुम कतई बेनाम और मामूली नहीं हो।
तुममें से हर एक जीवन की संतान है, जो ब्रह्मांड के प्रकाश-स्रोत से जन्मी है, ब्रह्मांडीय मानवता का सदस्य है, जिसे यहाँ उसके प्रतिनिधि के रूप में इस पृथ्वी पर भेजा गया है।
“मैं, ब्रह्मांड के रचयिता का प्रतिनिधि…?” यह सुनकर शायद तुम चौंक जाओ।
फिर भी, यहाँ पृथ्वी पर, ब्रह्मांड के स्रोत के पास जो पूरा अधिकार है, वह पृथ्वी विकास दल के लोगों को सौंपा गया है।
वह तुम हो।
तुम सब।
इसलिए कहा जा सकता है कि पृथ्वी का भविष्य तुम्हारे कंधों पर टिका है।
जब तक तुम अपनी हड़ताल खत्म करके उठ खड़े नहीं होते, इस ग्रह का कोई भविष्य नहीं है।
अगर तुम इंतज़ार करते रहो कि कोई तुम्हारे लिए यह कर देगा, तो वह कोई कभी सामने नहीं आएगा।
क्योंकि वह कोई और नहीं, तुम ही हो।
जब हम ऐसा कहते हैं, तो शायद तुम सोचो, “आज की दुनिया को देखकर मुझे बिल्कुल भी उम्मीद महसूस नहीं होती।”
सच है कि पृथ्वी की मानवता जो नकारात्मक विचार लगातार उँडेलती रही है, वे समय के साथ जमा होकर दुखों से भरी नियति रच रहे हैं।
पर जानते हो, नियति कतई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे हिलाया न जा सके।
अगर तुम इसी क्षण जीवन के सत्य की ओर लौट आओ और उस दिव्यता को फिर से जगा दो जो जीवन के प्रकाश का मूल स्वभाव है, तो वह नियति नरम पड़ जाएगी और समय के साथ अपनी चमक फिर से पाने लगेगी।
तब लोग एक-दूसरे की मदद करेंगे और ब्रह्मांडीय सभ्यता के नए युग की ओर आगे बढ़ सकेंगे।
जीवन के सत्य की ओर लौटना कोई कठिन बात नहीं है।
“यह शरीर ही मैं हूँ” वाली धारणा और पक्की मान्यता को लो, सोचो “यह मेरा असली स्वरूप नहीं था”, और उसे थोड़ी देर के लिए एक ओर रख दो। फिर यह याद करने का अभ्यास करो, “मैं स्वयं जीवन का प्रकाश हूँ।”
और अपने धीमे, शांत श्वास पर कृतज्ञता के भाव को हौले से रखते हुए अपने दिन बिताओ।
बस इतने से ही तुम्हारे भीतर का प्रकाश और उज्ज्वल हो जाता है।
जब तुम सुबह उठते हो, जब भोजन करते हो, जब किसी के पास से गुज़रते हो।
रोज़मर्रा के उन छोटे-छोटे पलों में, जो कुछ भी तुम्हें मिले, उसके लिए मन ही मन “धन्यवाद” बुदबुदाकर देखो।
ऐसे ही छोटे, शांत प्रयासों का जमा होना वह शक्ति बनता है जो इस ग्रह की नियति को फिर से रच देती है।

अब समय आ गया है कि उठ खड़े हो और प्रकाश बनकर नए सिरे से जियो।
आज की दुनिया, जो अंधकार जैसी दिखती है, उसे प्रकाश से फिर से रचना तुम्हारे सिवा और कोई नहीं कर सकता।
इसीलिए हम भी तुम्हारी चेतना के पुनर्जन्म और तुम्हारे दिव्य प्रकाश के पुनर्जागरण के लिए पूरी ताकत से तुम्हारा उत्साह बढ़ा रहे हैं।
पर्दे के पीछे की बात बताएँ तो, इस समय हम केवल तुम पर ही भरोसा कर सकते हैं।
इसलिए कृपया अपने हृदय की आँखें जगाओ।
पाँच इंद्रियों के जादू से स्नातक हो जाओ, छठी इंद्रिय पर मत रुको, और सातवीं इंद्रिय और उससे ऊपर की इंद्रियों को फिर से जगाओ।
इस तरह, कृपया अपनी सच्ची आँखें, हृदय की आँखें खोलो और देखो।
और फिर, देखो, तुम्हें हमारी आवाज़ें सुनाई दे रही हैं, है न?
अगर तुम अभी हमें नहीं देख पा रहे, तो चिंता मत करो।
जब तुम्हारी चेतना पाँच इंद्रियों की आसक्ति से मुक्त हो जाएगी, तब वह दिन आएगा जब हम एक ही रूप में मिल सकेंगे।
धीरे-धीरे श्वास लेते हुए, शांत मन से आकाश की ओर देखो।
अगर तुम्हें ऐसा क्षण महसूस हो जब सीने की गहराई में अचानक कुछ गर्म हो उठे, तो वह हमारी ओर से संदेश है।
उस क्षण की अनुभूति को शब्दों में ढालो।
तुम तारों के वे बच्चे हो जो सौरमंडल और आकाशगंगा की सबसे छोटी संतान, पृथ्वी के विकास में एक बहुत महत्वपूर्ण मिशन लेकर इस ग्रह पर उतरे हैं।
इसीलिए ब्रह्मांड के महान ईश्वर ने तुम्हें पृथ्वी की नियति को बड़े पैमाने पर मोड़ने का अधिकार दिया है।
तुम्हें दी गई शक्ति का उपयोग करना या न करना तुम पर निर्भर है।
यह ऐसी बात नहीं जिसे कोई तुम पर थोप सके।
ठीक है? तुम अपनी इच्छा से चुनते हो, और उसे दिव्य विचारों, शब्दों और कर्मों के रूप में व्यक्त करते हो।
कृपया पृथ्वी को उसकी पूर्णता तक ले जाओ।
जीवन के प्रकाश-स्रोत से सीधे जुड़ा जो प्रकाश तुम बिखेरते हो, उसे अभी थोड़ा और प्रबलता से फैलना है, पर वह पहले ही पृथ्वी के कोने-कोने तक पहुँच चुका है।
शायद तुम सोचो, “अगर मैं अकेला प्रकाश फैलाऊँ भी, तो दुनिया इतनी आसानी से नहीं बदलेगी।”
पर प्रकाश ऐसी चीज़ नहीं है जिसे एक या दो लोगों जैसी गिनती से मापा जाए।
जब तुम अँधेरे कमरे में एक दीपक जलाते हो, तो पूरे कमरे का अँधेरा मिट जाता है, है न?
चाहे वह एक व्यक्ति की छोटी-सी लौ जैसा दिखे, वह प्रकाश अगले व्यक्ति के प्रकाश को जगाता है, और समय के साथ इस ग्रह की एक-एक चीज़ को नया, पुनर्जन्मा बना देता है।
वह दिन ज़रूर आएगा!
इसलिए आज भी, सबके प्रति कृतज्ञता के साथ, अपने सामने का कदम उठाओ।
हम हमेशा तुम्हारे ठीक पास हैं।







