सामग्री पर जाएँ

तारों के साथ संवाद के युग का द्वार खोलने के लिए

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

Voice of Space Brothers

खुशी का सिद्धांत (4/4)

प्रकाशित अद्यतन

​ इसी नाम के पिछले लेख

[blogcard url=”https://hi.ascension21.com/voice-of-brothers-381/”]

[blogcard url=”https://hi.ascension21.com/voice-of-brothers-382/”]

[blogcard url=”https://hi.ascension21.com/voice-of-brothers-383/”]

 

(पिछली बार से जारी)

★कृतज्ञता की प्रार्थना का महत्व

ऐसा क्यों कहता हूँ, तो इसलिए कि अगर चेतना की जड़ में अपने जीवन के प्रति कृतज्ञता का भाव हो, तो सारी सृष्टि के प्रति कृतज्ञता, मन की स्वाभाविक हलचल के रूप में बिना प्रयास के हो जाती है।

ज़रा सोचकर देखो।

मनुष्य किसी की भी शक्ति लिए बिना, किसी की भी मदद के बिना तो जी ही नहीं सकता, है न।

सब के सब, बिना किसी अपवाद के, किसी न किसी व्यक्ति या चीज़ के सहारे जी रहे हैं।

फिर भी, अपना शरीर अर्पित करने वाले भोजन के प्रति कृतज्ञता नहीं, हमें स्थिर जगह पर खड़ा रखने वाली धरती के प्रति कृतज्ञता नहीं, ऑक्सीजन साँस में लेने देने वाली हवा के प्रति कृतज्ञता नहीं, उस ऑक्सीजन को बनाने वाले पौधों के प्रति कृतज्ञता नहीं, मनुष्य द्वारा बहाई जाने वाली बुरी हवा को बहाकर शुद्ध करने वाली पवन के प्रति कृतज्ञता नहीं, जीवन की क्रिया के लिए अनिवार्य जल के प्रति कृतज्ञता नहीं, और मूल रूप से सारे जीवों के उद्गम, समुद्र के प्रति कृतज्ञता भी अक्सर भूल जाते हो, है न।

और, केवल कृतज्ञता भूलना ही नहीं, प्राकृतिक वातावरण को चोट पहुँचाकर, पौधों की अनदेखी करके हवा को गंदा करके, जानवरों के घर छीनकर, ऊपर से शहर में निकल आए जानवरों को हानिकारक जीव कहकर दूर भगाना, और मनुष्यों के आपसी संसार में भी, लालसा और आत्म-रक्षा की प्रवृत्ति को आपस में टकराना, एक-दूसरे की टाँग खींचना, एक-दूसरे से छीनना भी होता है, है न।

कैसा लगा?

दिल दुखता है न।

यही पृथ्वी के बहुत से लोगों की सच्ची वर्तमान स्थिति है।

इसीलिए पृथ्वी की मानवता के भविष्य की चिंता की आवाज़ें उस लोक से भी और ब्रह्मांड से भी उठ रही हैं।

लेकिन हमने हार नहीं मानी है।

क्योंकि बहुत पहले दूसरे तारे पर हमारे साथ काम करने वाले तुम लोग इस युग में जी रहे हो।

★पूरे में अपने को घोलकर और फैलाकर जियो

तो, बात को अंत में समेटूँ, तो अगर खुश होना चाहते हो, तो हमें जीवन देने वाले हर अस्तित्व के प्रति कृतज्ञता की प्रार्थना अर्पित करो।

और, केवल अपनी मनोकामनाएँ ही नहीं, पूरे के सामंजस्य पर विचार करके, पूरी पृथ्वी की शांति के लिए हृदय की गहराई से प्रार्थना करो।

पूरा पृथ्वी-जगत खुश हो, तभी अपनी खुशी भी सच में चमकती है, है न।

इस अर्थ में, अभी सच में एक महत्वपूर्ण युग चल रहा है।

पिछले जन्मों से पाली गई आत्मा की शक्ति प्रकट करके, पूरी पृथ्वी की शांति पाने के लिए ही, तुम लोग अभी इस युग में जन्मे हो।

यह एक निर्विवाद तथ्य है, और अपनी उलझनों और कष्टों को एक ओर रखकर, “संसार के लिए, लोगों के लिए, ब्रह्मांड के लिए” अपने को अर्पित कर सकने वाले अग्रणी देवदूतों के रूप में तुम लोगों का जन्म हुआ है।

पूरे में अपने व्यक्तिगत स्व को घोलकर और फैलाकर जियो।

तब व्यक्ति का जीवन सच में जीता है।

दोहराकर कहता हूँ, ऐसा करके ही तुम लोगों के जन्म लेने का अर्थ पूरा होता है।

समझे न।

यही खुशी से जी सकने का सिद्धांत है।

व्यक्तिगत स्व एक भ्रम है, एक मायाजाल है।

वह शराब पीकर नशे में मस्त हो जाने वाली अवस्था जैसी बात थी।

अब ही जीवन के होश में लौटने की सही घड़ी है।

वह घड़ी अभी के सिवा और कोई नहीं।

मानवता का सार दिव्यता है, इसे पूर्ण रूप से स्वीकार करो।

ऊपर दिखने वाले कर्म से भरे रूप पर मन खो देना ठीक नहीं।

गहराई में देखो।

आयामों की गहराई में।

वहाँ झिलमिलाते पवित्र जीवन के सार को ही मज़बूती से पकड़कर जीने के लिए भी। (समाप्त)

 

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

इस ब्लॉग के संदेश, विषय के अनुसार एक पुस्तक-श्रृंखला में फिर से संजोए गए हैं।
यह श्रृंखला एक-एक खंड करके प्रकाशित की जाएगी।

Angelusbell

वीडियो जल्द आ रहे हैं

वीडियो एक-एक करके जारी किए जाएँगे।

YouTube चैनल पर जाएँ