असेंशन (आयामी उत्थान) हुई चेतना को स्वाभाविक मान्यता बनाने के लिए-5
प्रकाशित अद्यतन
(पिछली बार से जारी)
खारे-मीठे पानी के संगम वाले युग में जिस पर ध्यान देना चाहिए
2020 के दशक का आज का युग, पुरानी सभ्यता के अंत और नई सभ्यता की शुरुआत के आपस में मिलने वाला, खारे-मीठे पानी के संगम जैसा युग है।
यह सौ से अधिक वर्षों से कहा जाता रहा है, आज पृथ्वी जड़ से सब कुछ पलट देने वाले बड़े परिवर्तन के दौर में है।
उस परिवर्तन के दौर के चरम पर, अब तक की आम समझ बिल्कुल काम नहीं आएगी।
उस समय पहुँचकर पृथ्वी की मानवता को आख़िरकार पता चलेगा कि आग पहले ही पीछे लग चुकी थी।
उस समय पूरी पृथ्वी पर, अभी तक जीवन के सार को याद न कर पाए लोग, उलझन में रास्ता खोजेंगे, शायद।
दूसरी ओर, अतीत की उपलब्धियों, अधिकार, स्थापित हितों आदि को लहराते हुए, अब तक की आम समझ की सीध में भविष्य टटोलने वाले लोग भी दिखेंगे।
यह, पृथ्वी की सभ्यता के सच्चे सवेरे से ठीक पहले के घने अँधेरे की बात है।
अभी, पहले ही ऐसी स्थिति प्रकट होने लगी है, लेकिन बहुत से लोग अभी इसे “अपने भीतर की समस्या” के रूप में ग्रहण करने तक नहीं पहुँचे, इसलिए जीने के ढंग पर फिर से नज़र डालने की कोशिश करने वाले लोग अभी कम हैं।
सच कहूँ तो आज का पृथ्वी-जगत, बहुत पहले ही “तीसरे और चौथे आयाम के एक-दूसरे पर चढ़कर प्रकट होने की स्थिति” में प्रवेश कर चुका है।
इसलिए कम से कम यह जागरूकता ज़रूरी है कि “अब तक की आम समझ बिल्कुल काम नहीं आएगी।”

मानसिक कोशिकाओं और भौतिक कोशिकाओं की घूर्णन-गति बढ़ाएँ
असेंशन, भौतिक स्पंदन और मानसिक स्पंदन के हर सूक्ष्म कण की मूल घूर्णन-गति के तेज़ होते जाने की प्रक्रिया में होने वाले बदलाव को कहते हैं।
भौतिक स्पंदन और मानसिक स्पंदन के सूक्ष्म कणों की घूर्णन-गति अभी से और तेज़ होती जाए, तो “मनुष्य सौ-कुछ सेंटीमीटर लंबा, कुछ दर्जन किलो वज़न वाला है, और मैं यही भौतिक शरीर हूँ” ऐसा मानने वाले लोगों की सुस्त पाँच इंद्रियों को भी वह बदलाव महसूस होने का समय आएगा।
इसीलिए, अभी से थोड़ा-थोड़ा करके जीने का ढंग सँवारते रहना अच्छा है।
क्योंकि उस समय पृथ्वी-लोक का आयाम, चौथे और पाँचवें आयाम के एक-दूसरे पर चढ़ने वाली स्थिति में प्रवेश कर चुका होगा।
कभी मैंने सूक्ष्म लोक और आत्मिक लोक में रहने वाले लोगों की बात की थी न।
हमने तुम्हें बताया था कि वे जिस संसार में रहते हैं वह कैसा संसार है, वहाँ लोग कैसे समय बिताते हैं।
वहाँ प्रकट होने वाली स्थिति, पृथ्वी के भौतिक लोक का यथार्थ बन जाएगी।
जिसका मन तपा हुआ है, वह अपनी भावनाओं और दिव्यता को स्पष्ट रूप से पहचान सकता है, इसलिए उसे अपने विचारों से अंतहीन नरक गढ़कर उसमें फँसने की चिंता नहीं।
लेकिन जो उस समय ऐसे न हों, जो अतीत की सीध वाले भविष्य के हमेशा चलते रहने की गलतफ़हमी में हों, वे सूक्ष्म लोक या उससे नीचे के संसार, आत्मिक लोक के निचले हिस्से जैसे आकाश-धरती स्वयं गढ़कर, कुछ समय उसमें कष्ट भरे भाव झेल सकते हैं। लेकिन वहाँ से भी वे ज़रूर बाहर निकल सकते हैं।
ब्रह्मांड के महाजीवन ने ऐसी स्थिति को जितना हो सके रोकने के लिए, तुम लोगों को “परम शक्ति” दी है।
वह है “Divine Spark IN”।
(अगली बार जारी)







