अविश्वास और संदेह के आगे का तथ्य
प्रकाशित अद्यतन
★वह सच्ची बात जो तुम्हारा जीवन जानता है
मनुष्यों पर अविश्वास असल में खुद पर विश्वास न कर पाने का रूप भी है।
आत्म-अविश्वास की चरम सीमा ही मनुष्यों पर अविश्वास है।
ऐसा व्यक्ति दूसरों पर विश्वास नहीं कर पाता, ऐसा नहीं है।
वह खुद पर विश्वास नहीं कर पाता।
इस तथ्य को अपने मन के भीतर ठीक से देखना और परखना ही सचमुच मनुष्यों पर अविश्वास से निकलने से जुड़ता है।
हम पृथ्वी के मनुष्यों को देखते हैं, तो जो अपना मूल्य नहीं स्वीकार कर पाता, वह उतना ही दूसरों का मूल्य नहीं स्वीकार कर पाता।
इस तथ्य का क्या अर्थ है, अपने “जीवन” से अच्छी तरह पूछकर देखो।
जीवन सब कुछ जानता है।
इसीलिए हमेशा-हमेशा कहता हूँ, “जीवन के प्रकाश को याद करके स्वयं जीवन के प्रकाश के रूप में जीना अच्छा है।”
आज की पृथ्वी पर बहुत से लोग अपने विचारों के कोकून में लिपटकर जीवन के प्रकाश को सुलाए रखे हैं।
उसके बीच, अपने बनाए कोकून से निकलकर चेतना के विकास के महाब्रह्मांड में पंख फैलाने लगे तुम, सौरमंडल-ब्रह्मांड की आशा का प्रकाश हो।
अगर तुम न होते, तो पृथ्वी-संसार ब्रह्मांडीय समाज में शामिल नहीं हो सकता, और उससे पहले, तुम परमाणु ऊर्जा के दुरुपयोग से दूसरे तारों को परेशानी पहुँचने से रोकने की भूमिका निभा रहे हो।
पृथ्वी-संसार की पूर्णता में तुम्हारा योगदान अत्यंत दुर्लभ है।
अगर तुम इस तथ्य को याद कर लो, तो अपनी दिव्यता का पूर्ण बोध कर सकते हो, और वह समय सचमुच बस थोड़ा, थोड़ा और दूर है।
तुम अपनी निरंतर साँस को जितना आरामदेह बनाओगे, उतना ही तुम्हारा जीवन का प्रकाश प्रकाशित होकर दिव्यता पुनर्जीवित होती आएगी।
ऐसे तुम, अभी भी विचारों के कोकून में बंद लोगों की आशा का प्रकाश बनकर, उनका रास्ता रोशन कर रहे हो और उनकी पीठ को सहारा दे रहे हो।
यह तथ्य अभी पृथ्वी की अधिकांश मानवता को ज्ञात नहीं, लेकिन अंततः सबको पता चलेगा, और तुम्हें गड़गड़ाती तालियों के बीच कृतज्ञता और आशीर्वाद मिलेगा।
ऐसी बात की भी चाह न रखने वाले तुम हो, इसीलिए आज जैसा महान कार्य किसी को बताए बिना, लगातार, चुपचाप करते रह पाते हो।

ऐसे तुम्हें हम किसी से भी अधिक निकट से देखते और समर्थन करते हैं।
तुम्हारा अंतर्ज्ञान ही हमारी आवाज़ है, और तुम्हारी चाल ही हमारी अपनी चाल है।
हमारे और तुम्हारे बीच कोई अविश्वास या संदेह नहीं, हम जीवन के प्रकाश में एक होकर जुड़े, एक मन एक तन बनकर साथ काम कर रहे हैं।
जल्द ही हमारे रूप को मन की आँख से देखने वाले लोग बढ़ेंगे।
लेकिन न भी दिखे, हमारा तुम्हारे साथ मिलकर काम करना निर्विवाद तथ्य है।
अविश्वास और संदेह के आगे का तथ्य।
वह है ब्रह्मांड की मानवता का साथ हाथ मिलाकर, मिलकर तारों के विकास में लगे होने का रूप।
इस तथ्य को याद करने वाले लोग जितने बढ़ेंगे, पृथ्वी-संसार की भोर उतनी निकट आएगी, और आत्मिक प्रकाश की सुबह की धूप में नहाने वाले लोग एक के बाद एक निकलते जाएँगे।
ऐसा भविष्य पृथ्वी पर चित्रित करना……, यही हमारा और तुम्हारा साझा काम है, इसे एक बार फिर मन में अंकित करके, आज के दिन को नए मन से, सार्थक रूप से बिताओ तो मुझे खुशी होगी।






