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तारों के साथ संवाद के युग का द्वार खोलने के लिए

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

Voice of Space Brothers

अभी करने योग्य सबसे महत्वपूर्ण बात ~ साँस के गहराने से जुड़ा पृथ्वी का विकास (उत्तरार्ध)

प्रकाशित अद्यतन

​ इसी नाम का पिछला लेख

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(पिछली बार से जारी)

★अपनी सोच के अनुसार रचे जीवन का दोष दूसरों पर मत डालो

यह मिलन इतना कीमती और दुर्लभ है, जितना ग्रहों का एक सीध में आना।

आख़िरकार पृथ्वी-जगत के ब्रह्मांडीय समाज में शामिल होने का समय आ गया है।

इस तथ्य के मामले में अब पृथ्वी पीछे नहीं लौट सकती।

फिर भी अगर कोई पीछे लौटना चाहे, तो वह व्यक्ति पृथ्वी के नए स्पंदन से थोड़ा मेल न खाए, ऐसा हो सकता है।

लेकिन कोई उसका अस्तित्व मिटा देगा, ऐसा नहीं होगा, इसलिए निश्चिंत रहो।

बस वह अपने अनुकूल जगह पर, धीरे-धीरे आत्मा की सीख जारी रखेगा।

यह भी उस व्यक्ति का चुनाव और निर्णय है, इसलिए उसका सम्मान किया जाता है।

कोई क्या सोचे और कैसे कर्म करे, हर व्यक्ति को स्वतंत्रता की गारंटी है।

और उस स्वतंत्रता के भीतर, हर व्यक्ति अपनी यात्रा से सीखता जाता है।

सार यह है कि अपने विचारों, वचनों और कर्मों का सारा परिणाम अपने पास ही लौटता है।

और इस ब्रह्मांड में ऐसा कोई नहीं जिस पर कोई कुछ थोपता हो।

सब कुछ अपना चुनाव है।

किस परिस्थिति में जन्म लेते हो, कैसा जीवन जीते हो, इसमें भी अपने विचार, वचन और कर्म का गहरा हाथ है। लेकिन यह बात कठिन परिस्थिति में जीते लोगों को दोष देने के लिए नहीं, बल्कि इस आशा की बात है कि इस पल से भविष्य को उजाले से रचा जा सकता है।

इसीलिए कहता हूँ कि रोज़ के सहज विचार, दिमाग़ से गुज़रने वाला छोटा-सा विचार भी भाग्य रचने वाली महान शक्ति, प्रेरक शक्ति है।

हर व्यक्ति के उस चुनाव को मरोड़ने का अधिकार किसी के पास नहीं।

ब्रह्मांड कितना भी विशाल हो, तब भी।

इसलिए खुद को खुद अनुशासित करना, स्वास्थ्य और खुशी को साकार करने वाली बड़ी शक्ति बनता है।

उलटकर कहें, तो इस नियम को स्वीकार करके ज़िम्मेदार वचन और कर्म करते रहो, तो मनुष्य को खुश होना ही पड़ता है।

★आत्मा का महान विकास करने के लिए

इसकी मूल साधना है अपनी साँस को धीमा करना।

साँस गहरी हो जाए, तो चेतना अपने आप जीवन के स्रोत में प्रवेश करती है, और जीवन के मूल में बहती ब्रह्मांड-सृजन की प्रज्ञा से सीधे जुड़ जाती है, इसलिए उसे अपने जीवन में जीवंत करने लगते हो।

जिन्हें यह समझ आ गया, वे एक के बाद एक चेतना के विकास की सर्पिल सीढ़ी चढ़कर, पीड़ा से मुक्त दिव्य क्षेत्र वाला जीवन जीने लगे हैं।

ऐसे लोगों के पीछे-पीछे चलकर, बहुत से लोग उस जीवन-ढंग के संपर्क में आते हैं, और हर व्यक्ति सुख से जीने लगता है।

सबसे पहले करके देखो।

करने से पहले ही आलोचना कर देना, बड़ी बर्बादी है।

“आलोचक मत बनो” कहा जाता है न।

अमल करने वाले बनो।

सार्वभौमिक सत्य के आचरण से बढ़कर पवित्र कुछ नहीं।

ऐसा करो तो परिणाम पीछे-पीछे आता है, और सबसे पहले तुम खुद बदलते हो।

खुद बदले बिना सार्वभौमिक सत्य को केवल शब्दों में कहते रहो, तो वह सच्चे आनंद से नहीं जुड़ता।

इसलिए करो।

करने के सिवा और क्या है?

कुछ भी नहीं, है न।

“गहरी साँस के साथ जिएँ”, यह करके देखने पर ही “अच्छा, यह बात थी” समझ आता है, और दूसरों को भी सिखा सकने लगते हो।

आज जितना आत्मा के सच्चे मार्गदर्शकों की माँग है, उतना किसी युग में नहीं रही।

वे सार्वभौमिक सत्य को पैसा कमाने का साधन नहीं बनाते, सीधे उस पर चलते हैं, इसलिए लोगों का सही मार्गदर्शन कर सकते हैं।

वे अकेले बोध पाकर ऊँचाई से तमाशबीन बनकर लोगों की पीड़ा देखते नहीं रह सकते, बल्कि अपने ही शरीर को सीढ़ी बनाकर, सब लोग जीवन के मूल स्रोत का मार्ग चढ़ सकें, इसके लिए खुद को अर्पित कर देने वाले लोग हैं।

आगे चलकर तुम लोग भी उनमें शामिल होकर मानवता के उद्धार के पवित्र कार्य में भाग लोगे।

ऐसा कर सकने वाले लोगों को ही हम तैयार करना चाहते हैं।

इसलिए कठोर बातें भी करते हैं।

लेकिन जीवन स्वयं महान प्रेम है, इसलिए वह सबको जीवित रखता है, और बचाए बिना नहीं छोड़ता।

उस जीवन के प्रकाश से एक होने के लिए ही, अभी के हर पल का उपयोग करो।

अभी इस समय भी गहरी साँस लेते हुए यह बात पढ़ रहे हो, तो तुम्हारी आत्मा महान विकास करती है।

ज़रूर।

इसलिए हमेशा, हर समय धीमी, सहज साँस पर ध्यान लगाकर, शांत समुद्र-तट की लहरों की आवाज़ जैसी उस लय को खुद को सौंपकर समय बिताओ।

तरह-तरह की बातें ज़रूर सुधरने लगेंगी। (समाप्त)

 

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

इस ब्लॉग के संदेश, विषय के अनुसार एक पुस्तक-श्रृंखला में फिर से संजोए गए हैं।
यह श्रृंखला एक-एक खंड करके प्रकाशित की जाएगी।

Angelusbell

वीडियो जल्द आ रहे हैं

वीडियो एक-एक करके जारी किए जाएँगे।

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