अभी करने योग्य सबसे महत्वपूर्ण बात ~ साँस के गहरे होने से जुड़ा पृथ्वी का विकास (पूर्वार्ध)
प्रकाशित अद्यतन
★साँस को धीमा और आरामदायक रखने का महत्व
साँस को हमेशा धीमा और आरामदायक रखकर जियो।
सच में इससे बढ़कर कोई महत्वपूर्ण बात नहीं है।
यह जीवन के मूल स्रोत से जुड़कर जीना है, और सीधे-सीधे, दिव्यता प्रकट करके जीने का सबसे छोटा रास्ता है।
नहीं, केवल सबसे छोटा रास्ता ही नहीं, बल्कि यह ऐसा सरल तरीका है जिससे आसान तरीका कोई नहीं, और जिसे कोई भी कर सकता है।
और, पृथ्वी-जगत में रहने वाली मानवता को अभी जो सबसे ज़्यादा जानना चाहिए, वह यह है कि “मनुष्यों के अपने जीवन के प्रकाश को याद करके जीने के सिवा, पृथ्वी को बचाए रखने का कोई तरीका नहीं है।”
उसका तरीका है, अपनी साँस को चौबीसों घंटे गहरा रखकर समय बिताना।
साँस को हमेशा धीमा और आरामदायक रखकर जीना, सबको सामंजस्य में लाने का आधार है।
यह बात हम बार-बार क्यों कहते रहते हैं, इसका कारण जो अब समझ गया, उसने अनंत भविष्य का टिकट पा लिया।
साँस से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है।
लेकिन दूसरी ओर, साँस जितनी लापरवाही से बरती जाने वाली चीज़ भी कोई नहीं।
क्योंकि साँस छोड़ना और लेना, बिना ध्यान दिए अपने-आप होता रहता है।
यह बात दिल और शरीर के दूसरे अंगों के काम पर भी लागू होती है, जीवन के कामों को लगभग सभी लोग अनजाने में ही चलने देते हैं।
यहाँ समझाना कठिन है, लेकिन अब तक के संसार में, ध्यान न देने के कारण ही जीवन के काम में बाधा न पड़ने वाला पक्ष भी था।
उस युग में, जब मानवता का मन पूरी तरह कर्म से ढका था।

★जीवन के सत्य को भौतिक शरीर के ज़रिए प्रकट करने का युग आ गया
लेकिन अब ऐसा नहीं है।
युग पहले ही बदल चुका है।
ठीक-ठीक कहें, तो स्पंदन बदल गया।
इसलिए, अब तक अनजाने में उथली ली जाने वाली साँस को सचेत होकर गहरा करने से, जीवन के स्रोत से सीधे जुड़ने का मार्ग खुल गया।
पृथ्वी की लगभग सारी मानवता मनुष्य के सत्य को पूरी तरह भूल चुकी लगती है, यही अभी का समय जीवन के सच्चे सत्य को प्रकट करने की सबसे उपयुक्त सही घड़ी है।
उसे अपने ही शरीर से दिखाना तुम लोगों की भूमिका है।
पृथ्वी के कोने-कोने तक ऐसा कर सकने वाले को खोज लो, तुम लोगों के सिवा उसके योग्य कोई नहीं है।
क्यों, तो इसलिए कि तुम लोग पिछले जन्म के पिछले जन्म के उससे भी पिछले जन्म, इस तरह बहुत पीछे तक के प्राचीन समय से जीवन के सत्य की खोज करते आए लोग हो।
चींटी और टिड्डे की कहानी तो नहीं, लेकिन जब बहुत से लोग सामने के जीवन में ही उलझे थे, तब भी तुम लोग धीरे-धीरे, धीरे-धीरे आत्मा को निखारने में लगे रहे।
उसकी झलक फल देकर प्रकट होने लगी है, यही अभी का समय है।
इस जन्म का जीवन, पृथ्वी पर पुनर्जन्म के संचय की पूर्णता के रूप में, तुम लोगों ने स्वयं कामना करके पाया जीवन है।
इसलिए तुम लोगों के लिए, हर एक सेकंड, उँहूँ (सिर हिलाकर), हर एक क्षण ऐसा “बहुत महत्वपूर्ण क्षण” है जिसे ढीला नहीं छोड़ा जा सकता, और उस हर क्षण में, पिछले जन्मों से सैकड़ों गुना गति से आत्मा का निखरना आगे बढ़ रहा है।
यह जानते हुए या बिना जाने, तुम लोग जीवन के सत्य को याद करना चाहते हुए, याद करना चाहते हुए, तरह-तरह की किताबें पढ़कर, लोगों की बातें सुनकर, आख़िरकार यहाँ तक आ पहुँचे।
हम अभी तुम लोगों के जीवन के मूल निवास से यह संदेश भेज रहे हैं।
इसे लिखने वाले व्यक्ति के विचारों की आदत का फ़िल्टर थोड़ा-बहुत लगता है, लेकिन विषय-वस्तु लगभग ठीक-ठीक पहुँचाई जा रही है।
इसलिए, हमारी बातें अच्छी तरह सुनकर, अपने जीवन में उतारकर करो, तो निश्चित रूप से जीवन के मूल स्रोत में लौटकर जी सकते हो। (अगली बार जारी)






