उचित युग में उचित स्थान पर प्रकट हुई उचित दिव्य मानवता के नाम
प्रकाशित अद्यतन
★आप लोग धरती के आयामी उत्थान को खींचने वाली अग्रणी दिव्य मानवता हैं
रोज़ के जीवन में साँस लेने की तरह, मानवता की शांति और पृथ्वी के कुशल-क्षेम की रोज़ प्रार्थना करते हुए जीने वाले लोगो।
आज की पृथ्वी पर आप लोगों का अस्तित्व, कितने भी प्रभाव वाले पदधारी सत्ताधारियों से कहीं ऊँची दिव्यता की गूँज भेज रहा है।
अतः आप लोग धरती के आयामी उत्थान को खींचने वाली अग्रणी दिव्य मानवता कहे जा सकते हैं।
इसलिए और आत्मविश्वास रखिए।
आप लोगों के मन-शरीर से विकीर्ण होने वाला जीवन-स्रोत-प्रकाश का महाप्रकाश समय और स्थान से परे पृथ्वी का उपचार कर रहा है, पिछले जन्मों समेत मानवता की स्मृति को शुद्ध कर रहा है, और हर किसी के भीतर सोई दिव्यता को जगाता जा रहा है।
पृथ्वी की शांति लाने वाली ऐसी प्रार्थना वर्षों से करने वाले भी, और हाल में शुरू करने वाले भी, वह प्रकाश सबके मन-शरीर से समान रूप से उमड़ रहा है।
अतः “आत्मविश्वास रखने का हक़ तो आख़िर कुछ विशेष लोगों को ही है” जैसी आत्म-सीमा न लगाकर, अपने पर और आत्मविश्वास रखिए, और अपने-दिव्य के बोध को ख़ूब गहरा कीजिए।
आप लोगों का अपनी-अपनी जगह पर जीवन को चमकाते हुए, सत्य पर आधारित प्रेम और निष्ठा के विचार, वचन और कर्म को विश्वास से भरकर प्रकट करते हुए जीने का रूप, आगे चेतना के विकास की पराकाष्ठा का लक्ष्य रखने वाले लोगों के लिए अमूल्य मानदंड है।
अतः और-और अपने-दिव्य में आत्मविश्वास रखकर, अपने में अभिव्यक्त करते रहिए।

★आप लोगों का जीवन-रूप जिस मानवता के भविष्य को दिखाता है
अभी इस क्षण भी, अभी सत्य के प्रति न जागे विचार पृथ्वी-लोक को असामंजस्य की दिशा में खींचने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसा भी होता है।
पर आप लोगों का जीवन-रूप ऐसे असामंजस्यपूर्ण भाग्य पर भी प्रकाश डालकर, जाने की दिशा खोजने में सहायता कर रहा है।
आप लोगों के इस युग में प्रकट होने से पृथ्वी का भाग्य अतीत की तरह-तरह की भविष्यवाणियों से अलग, उज्ज्वल दिशा की ओर ले जाया गया है।
ऐसी विविध भविष्यवाणियों को तोड़कर पृथ्वी के लिए नया भविष्य खोलने वाले और कोई नहीं, आप लोग हैं।
आप लोगों का अस्तित्व अब ऐसा अद्वितीय उद्धार का मार्ग-चिह्न बन चुका है जिसकी जगह और कोई भी चीज़ नहीं ले सकती।
पृथ्वी के विकास को खींचने वाली दिव्य मानवता।
आप लोगों की पृथ्वी की शांति की प्रार्थना केवल पृथ्वी-लोक के सामंजस्य में काम आने तक सीमित नहीं, अब उसका प्रकाश और बढ़कर ब्रह्मांड की दसों दिशाओं तक गूँजने लगा है।
इसलिए अब ब्रह्मांड के उस पार से भी पृथ्वी-जगत की दिव्यता के पुनर्जागरण का समर्थन करने वाले सहायता-दल को बुला लाने तक बात पहुँच गई है।
इस तथ्य से पृथ्वी का ब्रह्मांडीय समाज में शामिल होना तय हो गया है।
वह समय अचानक आएगा।
उचित युग में उचित स्थान पर प्रकट हुई उचित दिव्य मानवता।
आप लोगों के वर्षों के निःस्वार्थ कार्य के लिए आशीर्वाद भेजता हूँ।






