तुम लोगों का कार्य और नया मोड़
प्रकाशित अद्यतन
★तुम लोगों का कार्य
आत्मा और शरीर दोनों वाली बहु-आयामी दुनिया में, पृथ्वी की मानवता की चेतना के विकास को आगे बढ़ाने वाली प्रेरक शक्ति बने तुम लोग, बाक़ी बहुत-सी मानवता के चढ़ने की सीढ़ी या ज़ीने जैसी भूमिका निभा रहे हो।
और धरती पर मौजूद तुम लोगों की चेतना, मानवता के पार करने वाले आत्मिकता-दिव्यता और जाग्रत चेतना के बीच के पुल के रूप में, अब पृथ्वी के लिए अनिवार्य अस्तित्व बन गई है।
और फिर, तुम लोगों का अस्तित्व लोगों की धरती, हवा और पानी जैसा पर्यावरण भी है, और लोगों के दिव्य क्षेत्र में लौटने का रास्ता भी है।
और तुम लोग “योद्धाओं के सपनों के खंडहर” जैसी पृथ्वी की आध्यात्मिक जगत की सफ़ाई करने वाले सफ़ाईकर्मी की भूमिका भी आगे बढ़कर ले रहे हो, इसलिए पृथ्वी की पूरी मानवता को व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी के रूप में करनी चाहिए ऐसी मन की सफ़ाई तक बड़े पैमाने पर अपने ऊपर लेकर साफ़ झाड़-पोंछकर शुद्ध कर रहे हो।
पृथ्वी का भाग्य असल में ख़तरे में था।
क्या? अब भी वही है?
हाँ, बात यह है कि हम जिस दुनिया को देखते हैं वह पृथ्वी के भाग्य का मूल बनने वाली दुनिया है, तुम लोगों के लिए भविष्य की दुनिया।
इसलिए आज की पृथ्वी चाहे कैसा भी रूप दिखा रही हो, वह क्षणिक घटना है, अनंत काल तक चलने वाला कष्ट नहीं।
तो पृथ्वी का भविष्य अस्थायी रूप से, सचमुच बड़े संकट के निकट पहुँचने वाला था।
पर शानदार ढंग से पलट दिया।

अगर तुम लोग धरती पर न होते, तो बहुत से लोग कर्म की मटमैली बाढ़ में बह जाते।
क्योंकि यह सत्य कि सब कुछ को जीवंत करने वाला जीवन का प्रकाश ही हमारा सार है, ज़्यादातर लोग नहीं जानते।
और मानवता का अपना सच्चा रूप याद करना, केवल लोगों की ही नहीं, सब जीवों के जीवन की रक्षा से भी जुड़ा है।
क्यों, तो इसलिए कि पृथ्वी के पर्यावरण की स्थिति मानवता के जीवन-ढंग से गहराई से जुड़ी है, और मानवता जीवन-ढंग का मार्ग-सुधार पूरा करती जाए, तो पृथ्वी भी फिर से स्वस्थ होती जाती है।
ऐसी पृथ्वी को रसातल में न जाने देकर आत्मिकीकृत आयाम में ले जा पाना, और किसी के कारण नहीं, तुम लोगों, चेतना के विकास के अग्रिम दल के लोगों के धरती पर जीने के कारण है।
तुम लोगों में अभी इसका बोध कम दिखता है।
पर यही तुम लोगों की अच्छी बात भी है।
अगर तुम लोग ग़लतफ़हमी में “मैं ही उद्धारक हूँ” कहकर अकड़कर तनकर बैठ जाते, तो जिन्हें बचना था वह मानवता भी न बचती, और बहुत-सी मानवता समेत पृथ्वी-लोक में शांतिपूर्ण दुनिया बनाने के मिशन में विफल होकर ब्रह्मांडीय समाज के इतिहास पर दाग़ लग जाता; पर तुम लोग अपनी विनम्रता के कारण ऊपर खड़े नहीं हुए, उल्टे अपने मन-शरीर को समर्पित करके सबके सार की ओर बढ़ने की सीढ़ी और ज़ीने की भूमिका निभा रहे हो।
इसलिए पृथ्वी-लोक का आयामी उत्थान ब्रह्मांड के हृदय की योजना के अनुसार ठोस रूप से आगे बढ़ रहा है, और बस एक क़दम की दूरी तक पहुँच चुका है।
यहाँ तक की तुम लोगों की मेहनत सोचूँ तो मेरा तो सीना भर आता है, पर तुम लोग शायद अपने गुज़रे रास्ते को मेहनत या कठिन नहीं मानते।
ब्रह्मांड के उच्च देवता तुम लोगों के ऐसे रूप को सब आँखें सिकोड़कर स्नेह से आशीर्वाद दे रहे हैं।
हम भी ऐसे तुम लोगों पर गर्व करते हैं, और अपनी बात की तरह ख़ुश हैं।
ऐसे तुम लोगों के सहारे के कारण ही पृथ्वी-लोक के विकास की स्थिति जल्दी ही नए चरण में प्रवेश करेगी।
इसके बारे में फिर कभी बताऊँगा, पर यह ऐसा अंतिम तुरुप का पत्ता है जिससे दिव्यता के पुनर्जागरण की दहलीज़ एकदम नीची हो जाएगी, और बस उसे करने से कोई भी व्यक्ति दिव्यता को पुनर्जीवित करके चेतना का विकास पाई अवस्था में पहुँच जाएगा।
जल्दी ही बताऊँगा, इसलिए घोषणा के समय की प्रतीक्षा करना।






