बुरी भविष्यवाणियों को फिर से लिखने वाला जीवन-ढंग
प्रकाशित अद्यतन
★भविष्यवाणियों से भटके बिना जीओ
शायद पहले भी तुमसे कहा था, “किस साल, किस महीने क्या होगा,” “किस मौसम में क्या होगा” जैसी बातें अनसुनी करके जीना ही सबसे अच्छा है।
क्यों? क्योंकि भविष्य के किसी बिंदु की स्थिति वहाँ तक पहुँचने के दौरान मानव-चेतना के उपयोग के ढंग से अच्छे या बुरे में बदलती रहती है, और कभी-कभी कुछ भी हुए बिना बीत जाती है।
सन् 2000 के आसपास की नोस्त्रादामुस वाली बात याद है?
तब भी आखिरकार कुछ नहीं हुआ और सहज रूप से 21वीं सदी में प्रवेश हो गया।
सच कहूँ तो नोस्त्रादामुस जिस युग के सूक्ष्म लोक का रूप देख रहा था, वह पृथ्वी की मानवता के लिए सचमुच बहुत कठोर स्थिति थी, लेकिन उसे अच्छी नियति में बदलने वाले दिव्य मानव पृथ्वी पर प्रकट हुए, जिससे पृथ्वी की नियति को फिर से लिखने में सफलता मिली और उसे टालना संभव हुआ।
इस तरह अतीत में कितनी भी बुरी नियति बना ली हो, जीवन-ढंग बदलो तो भविष्य जितना चाहो उतना फिर से लिखा जा सकता है। इसलिए कम से कम चेतना-विकास की दिशा में बढ़ रहे तुम भविष्यवाणियों से भटकना मत।
★पृथ्वी की नियति हर दिन फिर से लिखी जा रही है
वैसे अभी मैंने कहा कि फिर से लिखा गया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पृथ्वी-जगत का विनाश तय था।
अभी भी अस्थिर तो है, लेकिन पृथ्वी के नई सभ्यता के ब्रह्मांडीय युग में जाने की संभावना पहले की तुलना में काफ़ी बढ़ गई है।
हाँ, अभी के हिसाब से कहें तो शायद पचास प्रतिशत से थोड़ा ऊपर।
लेकिन अभी भी स्थिति ऐसी है कि निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता, और अभी जी रहे देहधारी मनुष्यों के भावों के उपयोग के ढंग से यह अनुपात अभी बदल सकता है, इसलिए आगे भी साथ मिलकर उजले भाव जोड़ते चलें।

★पृथ्वी को असेंशन कराने के लिए जीवन-ढंग
महत्वपूर्ण यह है कि वर्तमान पृथ्वी का हर व्यक्ति इस तथ्य को जाने कि “भविष्य को अभी इस क्षण का भाव गढ़ रहा है,” और जीवन के मूल सामंजस्य को प्रकट करते हुए जीए।
इसका मतलब है, “संतोष जानो, सभी जीवों समेत प्राकृतिक पर्यावरण के साथ सामंजस्य रखो, मानवता के अहं को समाज की व्यवस्था में से एक-एक करके हटाते जाओ, और उदात्त आध्यात्मिकता पर आधारित दुनिया हर व्यक्ति की चेतना से रचते जाओ।”
भविष्यवाणियों से भटके बिना, जो अभी कर सकते हो और करना चाहिए उसे पूरी शक्ति से करते हुए जीओ, तो उस व्यक्ति का जीवन ज़रूर उजला होता जाएगा, और ऐसे व्यक्ति एक या दो भी बढ़ते जाएँ, तो पूरी पृथ्वी की नियति भी ज़रूर उजली होगी।
इसी के लिए पृथ्वी पर जन्म लेकर परलोक लौटे देवता काम कर रहे हैं, और हम भी दिन-रात उत्साह बढ़ा रहे हैं।
★वह भविष्य अभी रचो जहाँ सब कुछ पूरा होता है
घबराओ मत!
पृथ्वी-जगत के विकास का दिन ज़रूर आएगा।
उस दिन को करीब लाने का तरीका बस अब तक कही बातों को लगन से अमल में लाना है।
असली सत्य से कहें तो अतीत अभी है, और अभी भविष्य है।
इसलिए अभी को दिव्य चेतना से जीओ, तो भविष्य में महा-निश्चिंतता की दुनिया ज़रूर आएगी।
वह कुछ दशकों बाद, कुछ साल बाद, एक साल बाद, कल, या शायद एक मिनट बाद हो, लेकिन वह समय निश्चित रूप से आएगा,
इसलिए महान विश्वास और महान निश्चय के साथ अभी को बिना पछतावे के जीओ।
क्योंकि पहले से ही ऐसी अवस्था में जीने वाले बहुत-से लोग हैं, और हार न मानो तो जीवन में असंभव कुछ भी नहीं।






