सत्य का ठिकाना सचमुच जान लो तो कोई भी असेंशन कर सकता है (उत्तरार्ध)
प्रकाशित अद्यतन
(पिछली बार से जारी)
★सत्य का ठिकाना जानना
यहाँ तक आकर, तुम पृथ्वी की मानवता को जो जानना ही होगा वह यह कि ब्रह्मांड के तारों के साझा सत्य का मुख्य मार्ग कहाँ है; और उसका सही उत्तर यह है कि सत्य के शब्द और उनकी गूँज भले दूसरों से सुनकर या पढ़ी हुई पुस्तकों से मिले हों, उस सत्य के वास्तविक तत्व के मौजूद होने की जगह अपने मन-शरीर के बाहर नहीं, सत्य खोजने वाले उस व्यक्ति की चेतना के अंतरतम में है।
यह सब लोगों के लिए समान रूप से कहा जा सकता है, और इस सिद्धांत के बाहर जीने वाला एक भी व्यक्ति नहीं है।
बस यह सत्य जानते, तो सूक्ष्म लोक के स्पंदन-लोक में मौजूद असत्य मिले स्पंदन में बहे बिना, सब जीवन के मूल स्रोत की दुनिया में लौट सकते हैं।
मनुष्य का सत्य में जीना, जीवन को सचमुच जीवंत करके जीना, इसका अर्थ है सत्य को अपने विचार, वचन और कर्म में प्रकट करके जीना।
इसके लिए, दोहराव होगा, पर सत्य क्या है और कहाँ है, यह सही ढंग से जानना ही होगा।
ठीक है?
अब तक की बातों में बताए सार को दोहराकर कहता हूँ, इसलिए ध्यान से सुनो।

सत्य जीवन का प्रकाश ही है।
जीवन का प्रकाश मानवता के भीतर, बाक़ी जीवों के भीतर, हवा के भीतर, पानी के भीतर, धरती के भीतर, ब्रह्मांडीय आकाश की हर एक जगह में भरपूर भरा हुआ जीवन-सिद्धांत है।
वह जीवन-सिद्धांत तुम लोगों का और हम ब्रह्मांड की मानवता का सार भी है।
इसका मतलब, जीवन के भीतर सत्य साँस ले रहा है, और हम सत्य से ही बने हैं।
यहाँ तक कह दिया, तो सत्य का ठिकाना समझ आ गया, है न।
सत्य तुम्हारे भीतर है।
बाहर खोजो तो सत्य नहीं है।
बस इतना-सा सत्य जान लो, तो किसी की भी चेतना की दृष्टि खुल जाती है, और चेतना का विकास आसानी से हो पाता है।
सत्य को खोजते-खोजते आए तुम्हारे लिए प्रेम सहित
(समाप्त)






