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तारों के साथ संवाद के युग का द्वार खोलने के लिए

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

Voice of Space Brothers

सत्य का ठिकाना सचमुच जान लो तो कोई भी असेंशन कर सकता है (पूर्वार्ध)

प्रकाशित अद्यतन

★सच्चे सत्य से मिलने के लिए

यह ज़माने की बात कहो तो ऐसा ही है, पर आज की दुनिया को विश्व-पैमाने पर देखो, तो सत्य कहे जाने वाले खरे-खोटे शब्द भरे पड़े हैं, और संत या उद्धारक कहलाने वाले लोग ढेरों सामने आ रहे हैं, है न।

तो भटकी जनता में से सत्य खोजने या रास्ता ढूँढने वाले लोग किसी की बात पढ़ते-सुनते हैं, उद्धार की तलाश में किसी का द्वार खटखटाते हैं; पर उस व्यक्ति के कहे या लिखे सत्य की सामग्री भले सही हो, स्वयं उसके विचार, वचन और कर्म सही न होना अक्सर होता है, इसलिए ऐसे मामले में सावधानी अनिवार्य है।

क्या बात है, तो जो शब्द कहने वाले के अपने विचार, वचन और कर्म से मेल नहीं खाते, ऐसे सत्य कहे जाने वाले शब्द मूल रूप से सत्य हैं ही नहीं, असत्य हैं, इसलिए।

★सच्चे सत्य में जीवन जीवंत होकर चमकता है

सच्चा सत्य वह है जिसमें जीवन का प्रकाश बहता है; उसे कहने वाले के विचार, वचन और कर्म और कहे गए सत्य के बीच दूरी हो, तो निकले शब्दों में जीवन का प्रकाश काम करना कठिन होता है, इसलिए लोगों के मन को हिलाने की शक्ति कमज़ोर हो जाती है।

समझ आता है?

जैसे आसान बात करें, मान लो कोई व्यक्ति कहता है, “अपनी सुविधा छोड़कर दूसरों को प्रेम करना किसी भी चीज़ से ज़्यादा महत्वपूर्ण है।”

पर वह शब्द कहने वाला खुद अपनी सुरक्षा को सबसे ऊपर रखकर, परोपकार नहीं, स्वार्थ के विचार से चल रहा हो, तो कही बात चाहे कितनी भी सही हो, उसके शब्दों में कोई सच्चाई या प्रभाव नहीं, है न।

यह, जो लोगों को दिशा देने की स्थिति में हैं, उन्हें उतना ही ज़्यादा ध्यान देने वाली बात है।

तो अब तक की नैतिकता, मानसिक साधना, धर्म आदि, अच्छी बातें बताते हुए भी लोगों के कष्ट को जड़ से पूरी तरह मिटा न पाए, ऐसा इसलिए हुआ कि बताने वाले का अपना अभ्यास शब्दों के साथ नहीं चल पाया, ऐसे मामले थे।

बहुत-सी जनता ब्रह्मांड के साझा सत्य के मुख्य मार्ग को भूली हुई है, नहीं जानती, इसलिए सत्य से सीधे जुड़े बिना दूसरों के सहारे (भरोसे) बचने या रास्ते पर चढ़ने की प्रवृत्ति रखती है।

इसीलिए, वचन-कर्म में मेल न खाने वाले शब्दों में भी अनजाने ही रास्ता खोज लेना होता था।

पर सत्य के अभ्यास के बिना “सही-से लगने वाले शब्दों” में लोगों में निहित मूल दिव्यता को पुनर्जीवित करने जितनी शक्ति बसना कठिन है, इसलिए बहुत से लोग द्वैत के टकराव की दुनिया में से आसानी से निकल नहीं पा रहे थे। (अगली बार जारी)

 

 

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

इस ब्लॉग के संदेश, विषय के अनुसार एक पुस्तक-श्रृंखला में फिर से संजोए गए हैं।
यह श्रृंखला एक-एक खंड करके प्रकाशित की जाएगी।

Angelusbell

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वीडियो एक-एक करके जारी किए जाएँगे।

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