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तारों के साथ संवाद के युग का द्वार खोलने के लिए

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

Voice of Space Brothers

अडिग प्रकाश-चेतना की स्थापना करो (उत्तरार्ध)

प्रकाशित अद्यतन

(पिछली बार से जारी)

★न जागी मानवता का सहयोग करो

जो लोग अभी दिव्य क्षेत्र की चेतना के प्रति नहीं जागे, वे अस्थायी रूप से ही सही, दुनिया भर में सतह पर आने वाली तरह-तरह की नियति की हलचल से उलझन में पड़कर चिंता से नकारात्मक भाव भी निकाल सकते हैं।

पूर्ण ध्रुवीकरण का भविष्य आपके चेतना-विकास से टल गया है, लेकिन व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी के रूप में पूरा करने योग्य आत्मा का गृहकार्य हर कोई लिए हुए है।

लेकिन पृथ्वी के मित्रो, चेतना-विकास पूरा कर चुके या कर रहे आप, कोई कैसा भी भविष्य चुने, किसी भी चीज़ से डरने या चिंतित होने की ज़रूरत नहीं।

क्योंकि आपदा दिखने वाली कोई भी असामंजस्य की लहर आपके मन और जीवन को ज़रा भी खतरे में नहीं डालेगी।

आपका शरीर-पात्र धरती पर न हो तो पृथ्वी की बड़ी सफ़ाई पूरी नहीं होती, इस कारण आपका शरीर विशेष जीवन-प्रकाश से सुरक्षित है और आप और अधिक दिव्यता चमकाते हुए जी सकते हैं।

उस प्रकाश की चेतना से अभी न जागी बड़ी संख्या की मानवता का मार्गदर्शन कीजिए।

यह ज़ोर से न्याय चिल्लाना नहीं है।

ज़बरदस्ती दूसरों को अपने विचारों में रंगने की योजना बनाना भी नहीं।

आपके जीने के ढंग से स्वाभाविक रूप से, किसी को पता चले बिना, पूरी मानवता की दिव्यता हर कोई आसानी से प्रकट कर सके, ऐसा स्पंदन-वातावरण तैयार करना है।

आप शरीर में मौजूद होकर साँस लेने भर से दुनिया को प्रकाशमय बनाने में भूमिका निभा रहे हैं।

अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हों, घर में बच्चे पालते हुए कोई सामाजिक काम न कर रहे हों, बिना किसी विशेष पद के साधारण कर्मचारी के रूप में काम कर रहे हों, छोटे स्वरोज़गार से गुज़ारा कर रहे हों, विद्यार्थी के रूप में पढ़ाई में डूबे हों, आप बस धरती पर होने भर से, हम उस पात्र को आधार बनाकर धरती को प्रकाशमय बनाने में सहयोग कर सकते हैं।

आपके कम से कम पाँचवें आयाम का आत्मिक-प्रकाश ग्रहण और प्रसारित करने वाला पात्र बनने से, आपकी अपनी दिव्यता के प्रकाश के साथ मिलकर, संबंधित ब्रह्मांडीय देवता और आत्माएँ मानवता के चेतना-विकास को त्वरित गति से सहयोग करने की व्यवस्था तैयार हो गई है।

दिव्यता के प्रति जागे आपकी खुशी की गारंटी है

इसलिए हम, आगे पृथ्वी-जगत में कैसी भी स्थिति आए, और चेतना-विकास की ओर बढ़ते रहने वाले आपकी खुशी की गारंटी देते हैं।

और समुद्र, पहाड़, नदी, वायु आदि का संचालन करने वाले अनेक ड्रैगन देवता और पवित्र आत्माएँ, धरती के हर क्षेत्र का संचालन करने वाले देवता और पृथ्वी-जीवन-देव, प्यारे पौधों की आत्माएँ, विशाल वृक्षों में बसकर मानवता का इतिहास देखने वाले वृद्ध, सब-सब, पवित्र अस्तित्व के हर देवता और शुभ आत्माएँ आपके शरीर की सुरक्षा करेंगे।

और आपके पीढ़ियों के पूर्वज, पृथ्वी-जगत के पवित्र देवता, और हम ब्रह्मांड के भाई-बहन, सब मिलकर शक्ति जुटाकर आपके पवित्र मिशन के पूरे होने में सहयोग करेंगे।

आपकी दृष्टि से हम न दिखने, न सुनाई देने वाले अस्तित्व हैं, और कुछ लोग हमारे शब्दों को संदेह से भी देख सकते हैं।

सच्चा राष्ट्र-जन्म शुरू होता है

लेकिन मित्रो, मूल रूप से हमारी दुनिया ही अधिक निश्चित अस्तित्व है, और आपकी दुनिया वह है जिसकी अभिव्यक्ति अस्थिर और अनिश्चित तत्वों से भरी है।

रूपक से कहें तो अब तक की दुनिया ऐसी दुनिया है जहाँ राष्ट्र-जन्म अभी पूरा नहीं हुआ, और राष्ट्र-जन्म की जापानी पौराणिक कथा में जहाँ आकाश और धरती घुले-मिले थे, धरती-आकाश ने अभी स्थान तय नहीं किया था, जीवों ने भी रूप-आकार तय नहीं किया था, उस स्थिति से अब तक की पृथ्वी-जगत की स्थिति में ज़्यादा फ़र्क नहीं है।

पृथ्वी का भविष्य आपकी चेतना के उपयोग के अनुसार आगे कैसे भी बदल सकता है।

पृथ्वी-जगत में अंतिम चरण का राष्ट्र-जन्म करना आपका और हमारा साझा काम है।

अतीत में भविष्य के कैसे भी बीज बोए हों, नियति तय नहीं है।

कृपया सिर्फ़ इस बात को मज़बूती से मन में पकड़े रहें, छोड़ें नहीं।

आखिरकार सच्चे अर्थ में राष्ट्र-जन्म शुरू होता है।

उस प्रक्रिया में जो अब तक मौजूद समझा था वह मिटेगा, और जो नहीं समझा था वह प्रकट होगा।

लेकिन किसी चीज़ से डरने की ज़रूरत नहीं।

सब कुछ अनिवार्य है, ब्रह्मांड के पूर्ण सामंजस्य की ओर विकास का एक-एक दृश्य है।

जैसे सुखद अंत तय फ़िल्म देखते हैं, वैसे पृथ्वी के भविष्य की कल्पना करते हुए दुनिया के बदलाव को बस देखते रहिए।

आप पृथ्वी के भविष्य को प्रकाशमय बनाने वाली प्रेरक शक्ति हैं

आपकी चेतना ही पृथ्वी को पूर्णता तक ले जाने वाली प्रेरक शक्ति है।

मत भूलिए।

भविष्य चेतना बना रही है।

उस चेतना को दिव्य क्षेत्र से निकालकर जीना है।

यह भूमिका पहले जागे आपसे निभवाना चाहते हैं।

मानवता की आशा का नेतृत्व कीजिए।

जब आप साँस लेते हैं, संबंधित कर्म को साथ लेकर जीवन के मूल स्रोत के प्रकाश में साथ नहाकर शुद्ध कर रहे हैं।

जब आप साँस रोकते हैं, जीवन के मूल स्रोत का आदि-प्रकाश आपके तन-मन में उमड़ता है और वह प्रकाश आड़े जुड़ी धरती की दुनिया में भी रिसकर पहुँचता है।

और जब आप साँस छोड़ते हैं, जीवन के मूल स्रोत का प्रकाश मानो स्पॉटलाइट की तरह पूरी मानवता की राह रोशन करके सत्य के जागरण को बढ़ावा देता है।

आगे जो भी हो और प्रकट हो, हर समय मन शांत रखकर प्रार्थनामय हृदय से दुनिया की चाल देखते रहिए।

तब ज़रूर सब कुछ प्रकाशमय होगा।

क्योंकि आप धरती पर हैं…

आप बस वहाँ होने भर से पृथ्वी के भविष्य को प्रकाशमय बनाने वाले «जीवन के प्रकाश» की नली हैं…

(समाप्त)

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

इस ब्लॉग के संदेश, विषय के अनुसार एक पुस्तक-श्रृंखला में फिर से संजोए गए हैं।
यह श्रृंखला एक-एक खंड करके प्रकाशित की जाएगी।

Angelusbell

वीडियो जल्द आ रहे हैं

वीडियो एक-एक करके जारी किए जाएँगे।

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