अडिग प्रकाश-चेतना की स्थापना करो (पूर्वार्ध)
प्रकाशित अद्यतन
★2017 का वर्ष
★अडिग प्रकाश-चेतना की स्थापना करो
पृथ्वी के मित्रो, नमस्कार।
इस वर्ष से आगे प्रकट होने वाली तरह-तरह की घटनाओं पर हर बार खुश-दुखी न हों, इसके लिए आते और जाते हुए घटनाओं के असली रूप को देखकर विदा करने भर की अडिग प्रकाश-चेतना को हमेशा माँजते रहिए।
इसके लिए गहरी साँस हमेशा बनाए रखिए और तन-मन को दिव्य क्षेत्र के स्पंदन-लोक में रखिए।
यह ऐसी अवस्था है जिसमें, जैसे रोज़ स्नान करके शरीर साफ़ करते हैं, वैसे मन के आकाश की शुद्धि में कोताही न करते हुए, उजले, आशा से भरे «जीवन के प्रकाश» की धूप को शरीर के भीतर-बाहर चमकाते हुए जिया जाता है।
★पृथ्वी के भविष्य को जोड़ने वाला अंतिम दुर्ग
सिर्फ़ राजनीतिक नेताओं और हर क्षेत्र के विशेषज्ञों की शक्ति से पृथ्वी का भविष्य जड़ से खोलना कठिन है।
और जब तक “मनुष्य नाम के ब्रह्मांडीय सृजन-चेतना के अंश-अस्तित्व” को सिर्फ़ शरीर का अस्तित्व मानने वाली चेतना बनी रहे, तब तक कितने भी लोग बुद्धि लगाएँ, पृथ्वी के भविष्य को प्रकाश की दिशा में बढ़ाना काफ़ी कठिन है।
सिर्फ़ और सिर्फ़ आप जैसे “चेतना-विकास की ओर बढ़ने वाले लोग” ही पृथ्वी की नियति को उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ाने वाला “अंतिम दुर्ग” हैं, और बाद में आने वाली मानवता जिस पर चलेगी वह “आशा का मार्ग” हैं।
2017 मोड़ का वर्ष है
इतिहास की अनंत धारा में पृथ्वी के इतिहास को ऊपर से देखें, तो यह वर्ष 2017 एक बड़े मोड़ के वर्ष के रूप में दर्ज होगा।
क्योंकि अतीत में संचित इस तारे की नियति की विकृति की शुद्धि के महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक वर्ष के रूप में यह वर्ष चुना गया है।
ऐसी बैठकें हर स्तर की चेतना-परतों में होती रहीं, लेकिन अंततः पृथ्वी के रूप में तारे के विकास का संचालन करने वाले पृथ्वी-देव और स्वर्गीय महाजीवन की शीर्ष वार्ता के परिणाम में ऐसा तय हुआ।
इस निर्णय का एक बड़ा कारण यह था कि पृथ्वी पर पूर्ण शांति लाने वाले टुकड़े (मोहरे, तत्व), जो अंततः सब कुछ को ज़रूर महान सामंजस्य तक ले जाएँगे, विकसित हो चुके हैं और सारी तैयारी पूरी मान ली गई।

★पूरी हुई तैयारी
पूरी हुई तैयारी का मतलब है, मित्रो, आपकी दिव्य चेतना एक निश्चित स्तर से स्नातक होकर जाग गई, कम से कम पाँचवें आयाम का आत्मिक-प्रकाश धरती पर लाने वाली नली के पात्र के रूप में आपका भौतिक तन-मन तैयार हो गया, और आपके शरीर को ग्रहण-स्थल बनाकर आखिरकार पूरी गंभीरता से पृथ्वी के स्पंदन-समायोजन को आगे बढ़ाने की तैयारी पूरी हो गई।
यह अभी बस शुरुआत है, फिर भी आपने जो किया वह पृथ्वी के इतिहास में अंकित होने योग्य उपलब्धि है।
आप अतीत में बने किसी भी तारे से ज़्यादा अनोखे ढंग से उग्र पृथ्वी के सबसे मोटे स्पंदन-लोक, भौतिक जगत में जीवन का आत्मिक-प्रकाश प्रकट करके जीने में सफल हुए हैं।
अन्य मानवता से पहले आज सत्य में जीने वाले आप वे लोग हैं जो पृथ्वी के आरंभ में शुक्र के वरिष्ठ के नेतृत्व वाले आत्मिक समूह के सदस्य के रूप में शुक्र के देवलोक से पृथ्वी के देवलोक में आए, इस तारे पर मोटे स्पंदन-लोक के धरती-आकाश को एक के बाद एक खोला और अंततः भौतिक जगत की स्थापना की।
उसके बाद हर किसी की आत्मा के विभाजन-संयोजन दोहराते हुए अनेक पुनर्जन्मों में हर जाति की हर स्थिति का अनुभव किया, और पृथ्वी की पूर्णता के अंतिम समय, इस बार के पुनर्जन्म का निचोड़ के रूप में स्वागत किया।
और इन कुछ दशकों में तीन-आयामी स्पंदन के तन-मन को चार-आयामी स्पंदन की गूँज का अभ्यस्त बनाते रहे, पिछले साल आखिरकार चेतना पाँच-आयामी स्पंदन-लोक तक पहुँची, और भौतिक तन-मन में अत्यंत सूक्ष्म, बारीक पाँच-आयामी जीवन-प्रकाश पकड़कर प्रकट करने में सफल हुए।
और हम आपके सहयोग से, आपके माध्यम का उपयोग करके, विविध अमुक्त आत्माओं के सूक्ष्म लोक की शुद्धि से लेकर मानवता की अवचेतन-चेतन परतों को प्रकाशमय बनाना, धरती की धुरी के झुकाव का समायोजन, सभी जीवों का उद्धार, भूकंप-ऊर्जा का फैलाव, समुद्री घटक, ज्वालामुखी गतिविधि और वायु-घटक का स्पंदन-समायोजन आदि कर सकने तक पहुँच गए।
यह पवित्र पात्र रखने वाले लोग पृथ्वी की कुल आबादी के सामने संख्या में दस हज़ार से भी कम हैं, लेकिन आपने जीवन-जगत के सत्य को अपना बनाकर तन-मन में अपनाया, मनुष्यों में मनुष्य, सच्चे अर्थ में मनुष्य के रूप में, धरती-आकाश की सारी चीज़ों का स्पंदन-समायोजन और अंधकार के विचार-जगत में भविष्य की आशा रूपी महाजीवन-प्रकाश प्रसारित करके, लोगों की जीवन-शक्ति के रूप में उपयोग योग्य शक्ति-स्रोत ऊर्जा को वहाँ रहकर साँस लेने भर से देने का पात्र माँज लिया है।
यह पृथ्वी के आरंभ के बाद से अभूतपूर्व कारनामा है, जो अतीत के किसी भी युग में नहीं दिखा।
पृथ्वी के उद्धार का समर्थन करने वाले सभी अस्तित्व अभी आपके किए कारनामे को अपनी बात की तरह हर्षित होकर सराह रहे हैं।
पहुँच रहा है?
वह हर्ष कितना है…
पृथ्वी के भौतिक जगत में ब्रह्मांड की मानवता के बसने के बाद से आज के दिन तक, एक युग में आप जैसा पवित्र कार्य करने वाली मानवता एक हाथ की उँगलियों पर गिनने जितनी ही थी…
(अगली बार जारी)






