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तारों के साथ संवाद के युग का द्वार खोलने के लिए

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

Voice of Space Brothers

स्पंदन-समायोजन के युग में (उत्तरार्ध)

प्रकाशित अद्यतन

​ इसी नाम के पिछले लेख

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(पिछली बार से जारी)

★आत्मिकीकरण की धारा पर सवार होने का तरीका

और अभी संसार में दिखने वाले, बिगड़ते हुए लगने वाले सब परिस्थितियों के बदलाव, हर ग्रह जिससे गुज़रता है ऐसी विकास और सृजन की प्रक्रिया हैं, इसलिए सार रूप में इनमें कोई समस्या नहीं।

क्योंकि अभी तुम लोग जिन स्थितियों का सामना कर रहे हो, उनमें रहने से मानवता के ठहरे हुए विचार झकझोरे जाते हैं, और यह उनकी गहराई में स्थित दिव्यता के प्रकट होने का निमित्त भी बन रहा है।

यानी कहा जा सकता है कि यह स्पंदन-समायोजन की भूमिका निभा रहा है।

इसलिए हर तरह के बदलाव को स्वीकार करो, पर किसी भी स्थिति या चीज़ से चिपके बिना, “सब कुछ ज़रूर अच्छा होता है” बस इतना सीधा-सादा सोचकर, पल-पल बदलती समय की धारा के बदलाव के अनुसार तुरंत ढलते जाना ही, आत्मिक होते संसार की लहर पर सवार होकर, अपने तन-मन को आत्म-देह और दिव्य-देह में घुलाते जाना है।

तुम लोगों को पता नहीं, पर पिछले कुछ दशकों तक तुम सूक्ष्म देह और भौतिक शरीर मिले-जुले स्पंदन-क्षेत्र में जी रहे थे।

इसीलिए उसे खारे-मीठे पानी के संगम से तुलना करके समझा रहा था।

अधिकतर लोगों के लिए बदलाव ऐसी चीज़ है कि कुछ समय बाद मुड़कर देखें तो “अरे, इतना सब बदल गया था!” कहकर आश्चर्य करें।

वर्तमान में हो रहे बदलाव को अत्यधिक संवेदनशीलता से पकड़ने वाले लोग भी हैं तो सही, पर वे बहुत थोड़े लोग ही हैं।

आत्मिक रूप से कुछ न दिखे, न सुनाई दे, तब भी “अभी यहीं” आत्मिक संसार बन जाए, तो ऐसी क्षमता कोई विशेष बात ही नहीं रह जाती, है न।

इसलिए किसी आत्मिक चीज़ की खोज में किसी को भारी पैसे देने की कोई ज़रूरत नहीं।

बार-बार कहता हूँ, सब बदलाव बिल्कुल स्वाभाविक ढंग से प्रकट होते हैं, और दिखने-सुनने से पहले ही बड़ा बदलाव हो जाता है।

और जैसे बहुत पहले के लोग किसी ऐसे दूर देश के यात्रियों से पहली बार मिलकर चकित हुए थे जिनकी उन्होंने कल्पना तक नहीं की थी, वैसे ही जब ब्रह्मांडीय मानवता आँखों के सामने प्रकट होगी, तब पृथ्वी के सब लोग एक समान रूप से जान जाएँगे कि वे ज़बरदस्त परिवर्तन की सही घड़ी में हैं।

हमारे पास की वैज्ञानिक शक्ति के सामने, सैन्य बल से रास्ता बनाने की कोशिश करते आए दुनिया के देशों के नेता कुछ नहीं कर पाएँगे, हर देश और इलाके के आतंकवादी, माफ़िया और अपराधी गिरोहों के सदस्य भी मुक़ाबला करने का कोई उपाय नहीं पाएँगे, दूसरों को धकेलकर भी बस अपना भला हो जाए इस सोच से दुनिया में आगे बढ़ते आए लोग भी समझ जाएँगे कि उस सोच के आगे कोई भविष्य नहीं और अपना जीवन-ढंग बदल लेंगे, दूसरों को मारने-घायल करने के कर्म-बंधन वाले लोग भी चेतना बदलकर दिव्यता याद करेंगे, और ईर्ष्या और द्वेष के अथाह दलदल में घुलकर जीते आए लोग भी, भविष्य की आशा से मन भरकर तन-मन हल्का पाएँगे, अपनी शक्ति से आत्म-देह में बदलकर परोपकार की भावना आत्मसात करते जाएँगे।

इस तरह, सब के सब, “हम ब्रह्मांड को रचने वाली पवित्र चेतना में हिस्सेदार थे”, यह बोध पूरी पृथ्वी की मानवता को हो जाएगा।

वह समय बहुत दूर नहीं है।

पृथ्वी के सब लोग भी उस दिन की राह देख रहे हैं।

लेकिन ऐसा होने के लिए, पूरे पृथ्वी-जगत के पदार्थ और आकाश का स्पंदन कम से कम चौथे आयाम तक, केंद्र बनने वाले स्थान पाँचवें आयाम तक, और पृथ्वी के विकास की अगुवाई करने वाले लोगों की चेतना पाँचवें आयाम तक पहुँचना ज़रूरी है।

इसलिए स्पंदन-समायोजन महत्वपूर्ण है।

तुम लोग तरह-तरह के अनुभवों के ज़रिए अपनी चेतना (के रूप) को निखार रहे हो, चाहे वह तुम्हें पसंद हो या न हो, उसका हर पल अमूल्य, पवित्र अनुभव है।

इसलिए आसपास और अपने-पराए सब कुछ को स्वीकार करके, सकारात्मक रूप से लो।

क्योंकि इस तरह जीने वाले मन के लिए ही उज्ज्वल भविष्य खुलता है। (समाप्त)

 

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

इस ब्लॉग के संदेश, विषय के अनुसार एक पुस्तक-श्रृंखला में फिर से संजोए गए हैं।
यह श्रृंखला एक-एक खंड करके प्रकाशित की जाएगी।

Angelusbell

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वीडियो एक-एक करके जारी किए जाएँगे।

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