स्पंदन-समायोजन के युग में (मध्य भाग)
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(पिछली बार से जारी)
★स्पंदन-समायोजन की आवश्यकता
तो उदाहरण के लिए भविष्य में, जब तुम लोगों का आत्मिकीकरण हो चुका शरीर उड़न तश्तरी में सवार होगा, तब उड़न तश्तरी के भीतर के पवित्र स्पंदन (कप्तान के मन की तरंगों के ज़रिए उड़न तश्तरी के भीतर फैला दिव्य क्षेत्र का स्पंदन) के संपर्क में आकर तेज़ शुद्धि-प्रतिक्रिया न हो, इसके लिए तुम्हें स्पंदन-समायोजन कक्ष से होकर भीतर आना होगा, और दूसरे तारों के आकाश-धरती में आते-जाते समय भी, स्पंदन-समायोजन करके ही आना-जाना होगा।
इस तरह ब्रह्मांड में निकलकर, बिल्कुल भिन्न स्पंदन-क्षेत्र में दृश्य मन-शरीर को ले जाते समय (※), उचित और ठीक समय पर स्पंदन-समायोजन पाकर, स्पंदन के बदलाव के अनुसार हर बार ढलते हुए जीना होगा। (※ आत्मिक चेतना के रूप में तो मनचाहे ढंग से कहीं भी जाया जा सकता है, या कहो अंततः सब कुछ अपने भीतर की बात के रूप में पकड़ा जा सकता है ← क्योंकि स्वयं ही ब्रह्मांड है)
बिल्कुल अलग बात है, लेकिन शिशु का माँ के गर्भ में लगभग 10 महीने बिताना भी, भौतिक लोक से घुलने-मिलने के लिए स्पंदन-समायोजन की अवधि है।
इस तरह स्पंदन-समायोजन, मनुष्य के जीने में अनिवार्य चीज़ है।
सब लोग बिना ध्यान दिए तरह-तरह से करते तो रहते हैं।

★हर चीज़ से बढ़कर स्पंदन-समायोजन
भविष्य में, तरह-तरह के स्पंदन-समायोजन जैविक सामग्री से बने समायोजन-यंत्रों से होने लगेंगे, लेकिन तब तक, प्रार्थना के ज़रिए जीवन के स्रोत से एकाकार होना ही हर चीज़ से बढ़कर, स्पंदन-समायोजन का सबसे अच्छा तरीका रहेगा।
उसमें निश्चित रूप से, जिसकी हम हमेशा बात करते हैं वह साँस का नियंत्रण भी, मन-शरीर को सूक्ष्म स्पंदन में बदलने वाले महत्वपूर्ण तत्व के रूप में जुड़ा है, इसलिए जो लोग अभी से हमेशा धीमी और आरामदायक साँस का ध्यान रखते हैं, वे पृथ्वी का आत्मिकीकरण और आगे बढ़ने पर, अब तक किए गए काम का फल पाकर, स्पंदन-क्षेत्र के बदलाव के साथ तुरंत ढलकर, मन-शरीर का स्पंदन-समायोजन आसानी से कर पाएँगे।
धीरे-धीरे, जीवन के मूल स्रोत का स्पंदन पृथ्वी के दृश्य जगत तक पहुँचने वाले पिरामिडों में प्रवेश करके स्पंदन-समायोजन का मार्ग सबके लिए खुल जाएगा।
उस समय चेतना का विकास तेज़ी से आगे बढ़ेगा, इसलिए रोज़ के भोजन का ढंग जैसी बातें भी महत्वपूर्ण हो जाएँगी।
असेंशन, आयामी उत्थान और चेतना के विकास से सीधा संबंध न रखने वाली लगने वाली भोजन के महत्व की बात हम क्यों करते रहे, यह भी वह समय आने पर अपने-आप समझ में आ जाएगा।
सारे मार्ग, जीवन के मूल स्रोत से मिलन और एकाकार होने नाम के एक ही बिंदु, एक ही दिशा की ओर जुड़े हुए हैं।
बदलाव और परिवर्तन की गहराई में झिलमिलाते पवित्र जीवन के प्रकाश को देखो।
वह बाहर ढूँढ़ने पर नहीं मिलता।
क्योंकि वह हर व्यक्ति के मन की गहराई में है। (अगली बार जारी)





