तारों को पूर्णता तक ले जाती आई ब्रह्मांडीय दिव्य आत्माओं (वांडररों) के नाम (उत्तरार्ध)
प्रकाशित अद्यतन
इसी नाम का पिछला लेख
[blogcard url=”https://hi.ascension21.com/voice-of-brothers-430/”]
(पिछली बार से जारी)
★तुम लोग सबसे पुरानी मानवता हो
ऐसा दृढ़ता से क्यों कह सकता हूँ, तो इसलिए कि तुम लोगों की ब्रह्मांडीय आयु पृथ्वी पर सबसे पुराने वर्ग में आती है।
पृथ्वी पर आने से पहले दूसरे ग्रहों पर पुनर्जन्मों की संख्या तो है ही, पृथ्वी पर पुनर्जन्मों की संख्या में भी तुम लोग सबसे आगे हो, और कम से कम कई दसियों हज़ार जन्मों का अनुभव कर चुके हो।
इसका क्या अर्थ है, तो जीवन के मूल स्रोत से निकली सात नाओबी प्रकाश-धाराओं में से हर एक का कम से कम 2401 बार, यानी कुल 16807 बार अनुभव कर चुके हो।
सरल गणना के सूत्र से दिखाएँ, तो
49 बार×49 बार=2401 बार
2401 बार×7 बार=16807 बार
होता है, और कम से कम 16807 बार पुनर्जन्म के ज़रिए शरीर में जन्म लेने के अनुभव के साथ, और भी अद्भुत लोग वहाँ से आगे सात धाराओं के अलग-अलग मेल वाले जीवन भी बार-बार जी चुके हैं, इसलिए सबसे पुरानी आत्मा वाले लोग कितने शारीरिक जीवन जी चुके हैं, इसका अनुमान लगाना असंभव है।
यही तुम लोगों का सत्य है।

★तुम लोगों का सत्य यह है कि तुम तारों को पूर्णता तक ले जाती आई ब्रह्मांडीय दिव्य आत्माएँ हो
इस तरह तुम लोग ऐसे लोग हो जिन्होंने हर देश और इलाके, जाति और लिंग, स्वास्थ्य और अस्वास्थ्य, पूर्ण और अपूर्ण शरीर, भले और बुरे, अमीरी-ग़रीबी के तरह-तरह के अनुभव आदि, आज पृथ्वी पर जी रही पूरी मानवता जिन-जिन जीवन के कष्टों और पीड़ाओं से गुज़र रही है, उन सबका स्वाद पूरी तरह चख लिया है।
इसीलिए कई अरब से भी अधिक (परलोक के लोगों समेत) मानवता से पहले, तुम्हारी चेतना की तरंग-लंबाई असली सत्य और सार्वभौमिक सत्य से मेल खा गई, और तुम जीवन के मूल स्रोत की जानकारी से सबसे पहले मिल सके।
इसीलिए तुम लोग, अतीत की विचार-आदतों से खुद को कितना भी तीव्रता से नकारो, उसे पलटने लायक जोश, साहस और अच्छे अर्थ में हार न मानने की ज़िद भीतर से उबल-उबलकर उठती है, और तुम खुद ही खुद को सार्वभौमिक सत्य के मूल स्रोत की ओर ले जा रहे हो, यही बात है।
आगे पृथ्वी की मानवता जो अनुभव करेगी, वह बहुत से लोगों के लिए अभूतपूर्व अनुभव होगा।
लेकिन तुम लोगों की दृष्टि से, वह दूसरे ग्रहों पर कई बार अनुभव किया हुआ “एक ग्रह के संसार के पूर्णता तक पहुँचने का पल” है।
तुम लोगों की आत्मा का सत्य यह है कि तुम अनेक तारों को पूर्णता तक ले जाती आई ब्रह्मांडीय दिव्य आत्माएँ (वांडरर) हो।
जिन्हें अभी यह तथ्य याद नहीं, उन्हें भी जल्द ही इसे नकारा न जा सकने वाले यथार्थ के रूप में याद करने का समय आएगा।
ऐसे तुम लोगों का पृथ्वी-जगत में सबसे बड़ा दायित्व है, जीवन के सत्य को पूरी तरह भूल चुके लोगों में, मानवता के जीवन के सार, यानी दिव्यता को फिर से जगाना, और ऐसा करते-करते स्वाभाविक रूप से तुम खुद भी अपने जीवन के मूल स्वरूप से एक होते जाते हो, यही बात है।
उस प्रक्रिया में होने वाला स्पंदन-समायोजन जितना हो सके शांति से पूरा हो, इसके लिए आज भी, कल भी, परसों भी, मानवता के सार, यानी दिव्यता की प्रार्थना करते हुए समय बिताओ, यही चाहता हूँ।
कुछ समय में, सबको दिल से चकित कर देने वाला बड़ा बदलाव आएगा, और पृथ्वी-जगत दिव्यता के ग्रह के रूप में फिर से जन्म लेगा, वह समय आएगा। (समाप्त)






