सच्चे अभी को जियो
प्रकाशित अद्यतन
◎इस संसार की वास्तविकता के रूप में प्रकट हुई हर घटना अतीत है।
◎सच्चा अभी, हर क्षण की चेतना में है।
◎अतीत में पृथ्वी की मानवता की “हर क्षण की चेतना” का जोड़, आज की घटनाओं और प्रसंगों का असली रूप है।
◎इस क्षण पृथ्वी की मानवता की “हर क्षण की चेतना” का जोड़ भविष्य का भाग्य रचता जाता है।
◎इस संसार की एक ही वास्तविकता से सामना होने पर भी, उसके बाद का भाग्य हर व्यक्ति का अलग क्यों होता है? वह इसलिए कि एक ही वास्तविकता के बीच, “सकारात्मक रूप से लेकर भविष्य की ओर कदम बढ़ाया” या “नकारात्मक रूप से लेकर वहीं रुक गया”, यह अंतर है।

◎दूसरों के शब्दों से न डगमगाकर, टीवी या अख़बार की सूचनाओं से भी न डगमगाकर, जीवन के भीतर से उमड़ने वाले प्रथम अंतर्ज्ञान पर ही विश्वास करके, लगन से भविष्य की ओर कदम बढ़ाओ।
◎ज़िम्मेदारी दूसरों पर डालने वाली सोच की आदत से आगे बढ़ो।
◎किसी का भी इरादा तुम्हें डगमगा नहीं सकता। तुम्हें डगमगा सकने वाली केवल तुम्हारी अपनी चेतना है।
◎मनुष्य जब उस लोक में लौटता है, तब साथ ले जा सकता है केवल उस समय की चेतना। इसलिए, चेतना को निखारकर ऊँचा उठाएँ, और जीवन की मूल भोली-निर्मल पवित्रता की ओर मूल बिंदु पर लौटें।
◎जब तुम भौतिक शरीर में रहते हुए मनुष्य की मूल पवित्रता तक लौट आओगे, तब तुम स्वयं बदलोगे, और साथ ही तुम्हारे आसपास के लोगों के मन को भी प्रकाशमय बनाओगे।




