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तारों के साथ संवाद के युग का द्वार खोलने के लिए

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

Voice of Space Brothers

बाक़ी 4 महीने पार कर लें ~ आधुनिक नूह की नौका पर सवार होकर सभी जीवों और पूरी प्रकृति के उद्धार के लिए (पूर्वार्ध)

प्रकाशित अद्यतन

★आधुनिक नूह की नौका बनने वाली चेतना को जियो

संसार कैसे भी बदलता जाए, “हर बार कपड़े बदलने की तरह बदलने की ज़रूरत न रखने वाली सामान्य धारणा और स्वाभाविक मान्यता”, “चलन और फ़ैशन के आने-जाने या दिखावे से बिल्कुल असंबंधित जगह पर स्थित ब्रह्मांड के सत्य और नियम”।

ऐसे, [किसी भी युग में मान्य मूल्य-बोध] को ही, अपनी पहचान की नींव में रखकर जीना अच्छा है।

क्योंकि उस सत्य में जड़ें जमाए मूल्य-बोध (कुछ भी हो जाए, न बदलने और न मिटने वाली पहचान) ही, तुम्हें हर तरह की कठिनाई से मुक्त अवस्था तक ऊपर उठाने वाली “नूह की नौका जैसी भूमिका” निभाता है।

और ऐसी पहचान को जीने वाले सभी लोग गहरे प्रेम वाले होते हैं, इसलिए “केवल मेरा भला हो तो बस” ऐसा नहीं सोच पाते, और “सब साथ मिलकर खुश रहना चाहते हैं” ऐसी आशा रखते हैं।

लेकिन ऐसे गंभीर मूल्य-बोध के साथ, “हाँ-हाँ, ऐसा ही होना चाहिए” कहकर साथ देने वाले लोग अक्सर आसपास नहीं होते, और इस व्यक्ति के साथ सत्य बाँटना चाहकर जोश से बोलो तो “यह तो बस आदर्शवाद है” कहकर ठुकरा दिया जाता है, और अगर ज़बरदस्ती करो तो, जिनकी नज़र अभी सत्य की ओर नहीं गई है ऐसे बहुत से लोग शायद समझ न पाएँ।

लेकिन तुम लोगों का वह शाश्वत मूल्य-बोध ही वास्तव में सत्य है, और तुम लोगों की जीवन-शैली में ज़रा भी ग़लती नहीं, इसलिए कोई कुछ भी कहे, आसपास के लोग कुछ भी सोचें, तुम लोग जैसे हो वैसे ही, मन को डगमगाए बिना, विश्वास से भरपूर जीवन की चमक बिखेरते हुए, बिल्कुल स्वाभाविक रूप में जीते रहो, बस।

संसार में कहीं भी कुछ भी हो, अपने आसपास कुछ भी हो, मन को धुँधला किए बिना, तुम लोग बस प्रकाश की ऊर्जा बिखेरते हुए वहाँ मौजूद रहो, इतना काफ़ी है।

क्योंकि कुछ समय में, जन-मानस ही सत्य की ओर देखने लगेगा, और तुम लोग जहाँ अभी हो उस जगह की ओर चलकर आएगा।

ऐसा होगा यह निश्चित रूप से क्यों कहते हैं, तो इसलिए कि तुम लोगों के मन का निवास-स्थान और तुम लोग जिस दिशा का लक्ष्य रखते हो, केवल वहीं मानवता का स्थायी भविष्य पाया जा सकता है, यह बात आगे चलकर हर किसी को स्वाभाविक रूप से समझ आने का समय आएगा।

★भोर से पहले अँधेरा सबसे गहरा होने वाले युग की वर्तमान स्थिति

अब से पृथ्वी-संसार बहुत बदलेगा।

ख़ासकर इस साल 2018 में, आख़िरी दिन तक हर दिन को महत्व देकर बिताने लायक, महत्वपूर्ण समय चल रहा है।

पिछले साल के अंत और इस साल की शुरुआत में, साँस रोककर देखने वाली स्थिति थी, और ज़्यादा विस्तार से बताते तो कुछ लोग चिंतित हो जाते, इसलिए अधिकांश लोगों को विस्तार से नहीं बताया था।

तो कुछ संकल्प वाले लोगों से, पिछले साल से ही, IN (पृथ्वी-लोक के उद्धार का तुरुप का पत्ता) के ज़रिए प्रार्थना के सहयोग का निवेदन किया था, इसलिए निःस्वार्थ मन वाले सभी स्वयंसेवक, अब तक प्रति व्यक्ति कुल हज़ारों, दसियों हज़ार बार IN को बार-बार अभ्यास में ला चुके हैं, और पृथ्वी का जड़ से (आत्मिक आयाम से) उद्धार करने वाला ब्रह्मांडीय महान पवित्र कार्य पक्के तौर पर फल दे रहा है।

उसका प्रमुख फल है, पृथ्वी को दसियों परतों में घेरकर लपेटने वाली प्रकाश की ढाल-परत का पूरा होना।

इससे, जो आपदाएँ और संघर्ष वास्तव में पृथ्वी पर होने वाले थे उनका पैमाना, बड़ी विपत्ति हो तो मध्यम, मध्यम हो तो छोटी, छोटी हो तो शून्य, इस तरह छोटा और छोटा होता जा रहा है।

तुम लोगों की प्रार्थना, बहुत से जीवनों की रक्षा करने वाली बड़ी शक्ति बनती आई है।

पृथ्वी-लोक में चेतना के विकास के अग्रिम दल, यानी तुम लोगों में से हर एक ने, उद्धार के कार्य को शानदार ढंग से पूरा करके, अंधकार भरे भविष्य को पलट दिया, और नुकसान को न्यूनतम तक सीमित रखा।

लेकिन फिर भी, पृथ्वी के दृश्य जगत में उस प्रकाश को ढकने की तरह, दिव्यता को भूली मानवता के एक के बाद एक छोड़े गए कर्म-विचारों के काले बादल धरती के पास उमड़ते हैं, सबके मन के आकाश को अँधेरा करते हैं, और वह कभी-कभी प्रकृति की डगमगाहट के रूप में प्रकट होता है, और वास्तव में बहुत से लोग कठिनाई में हैं। लेकिन यह बात कठिनाई में पड़े लोगों को दोष देने के लिए नहीं है। (आत्म-विघटन के छोटे चक्रों में होने लगने का कारण यह है कि पृथ्वी-लोक का स्पंदन आयामी उत्थान की सही घड़ी में पहुँचकर आत्मिक हो गया है, इसलिए कारण और परिणाम का चक्र-नियम सूक्ष्म लोक की स्थिति के क़रीब हो गया है)

जीवन के सत्य पर अभी ध्यान न दे पाए लोगों के विचार भी, अनजाने में पृथ्वी के भविष्य पर छाया डाल सकते हैं।

वे लोग भी, यह सोचे बिना कि उनके विचार इस तरह पृथ्वी पर असर डाल रहे हैं, बस अलगाव वाली सोच के साथ समय बिता रहे हैं।

बेशक इसे पलटने वाले पक्ष के, प्रकाश की चेतना वाले लोग भी बढ़ रहे हैं, लेकिन स्थिति अभी भी बराबरी पर टिकी है, असल बात यही है। (अगली बार जारी)

 

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

इस ब्लॉग के संदेश, विषय के अनुसार एक पुस्तक-श्रृंखला में फिर से संजोए गए हैं।
यह श्रृंखला एक-एक खंड करके प्रकाशित की जाएगी।

Angelusbell

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वीडियो एक-एक करके जारी किए जाएँगे।

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