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तारों के साथ संवाद के युग का द्वार खोलने के लिए

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

Voice of Space Brothers

दिव्यता को प्रकट करने वाले जीवन-ढंग के बारे में (उत्तरार्ध)

प्रकाशित अद्यतन

(पिछली बार से जारी)

★दिव्य चेतना को बाहर लाने की कुंजी है मानवता के प्रति प्रेम की प्रार्थना

उस कार्य और शक्ति को प्रकट करने के लिए, सब कुछ छोड़कर, प्रार्थना करना है।

और प्रार्थनाओं में भी, पृथ्वी-लोक के अत्यावश्यक विषय, मानवता की चेतना के विकास की कामना करने वाली प्रार्थना करना देव-बुद्ध का हृदय है और हमारी कामना भी है।

किसी भी तारे के लिए समान रूप से कहा जा सकता है कि जब मानवता का मन शांत हो जाता है, तब उस तारे के आकाश-धरती का सब कुछ सामंजस्यपूर्ण रूप में बदल जाता है।

इसलिए उस तारे की मानवता की चेतना ही उसके आकाश-धरती के रूप को तय करने वाला महत्वपूर्ण तत्व है, यह कहा जा सकता है।

तो तुम लोगों को अपनी चेतना के संचालन में सबसे मूल में रखकर जो बात सीखनी चाहिए, वह यह है कि पूरी मानवता सामंजस्य में रहकर, आपस में सहयोग करते हुए तारे की दुनिया रचती जा सके, इसकी कामना करने वाले प्रार्थनामय हृदय को आधार बनाकर सारे विचार भेजो, शब्द बोलो और कर्म करो।

क्योंकि बस पृथ्वी की मानवता शांत मन वाली बन जाए, तो पृथ्वी-लोक एक क्षण में शांत तारा बन जाता है।

तो ऐसी गूँज भेजने वाले व्यक्ति में देव-बुद्ध की शक्ति आसानी से प्रकट होने लगी है, इसलिए हमारे लिए भी शक्ति देना आसान हो गया है।

ऐसे लोग एक-दो करके बढ़ें, तो इतने से ही पृथ्वी का आत्मिकीकरण काफ़ी आगे बढ़ता है।

इसलिए अभी, सब कुछ छोड़कर, किसी भी और चीज़ से पहले, पृथ्वी की मानवता की शांति की प्रार्थना करना अच्छा है।

ऐसा प्रार्थनामय हृदय हमेशा रखकर जीने वाला व्यक्ति देव-बुद्ध के मन को अपना मन बनाकर जीने वाला व्यक्ति है, इसलिए उसके विचारों की चाहे कैसी भी आदतें (दोष, कमियाँ) हों, वह बिल्कुल बड़ी समस्या नहीं, और न जाने कब मानवता के प्रति प्रेम की देव-बुद्ध चेतना के भीतर धुंध की तरह छँटकर मिट जाती है।

और वहाँ जो बचता है वह केवल देव-बुद्ध का हृदय, दिव्य चेतना है।

मनुष्य कोई भी, कोई कठोर साधना किए बिना, देव-बुद्ध के ही अंश-जीवन के रूप में शरीर धारण करके जी सकता है।

पृथ्वी पर, मानवता से आगे बढ़कर, इस तरह दिव्य मनुष्य के रूप में धरती पर जी रहे लोग वास्तविक कार्य-दल के रूप में पहले ही कई हज़ार मौजूद हैं।

आज की पृथ्वी को उन लोगों के पात्र से विकीर्ण होने वाले उनके अपने जीवन के प्रकाश, देव-बुद्धों के कृपा-प्रकाश और हमारे सामंजस्य-स्पंदन से मज़बूती से सहारा मिला हुआ है।

इस स्थिति को और प्रकाशमय बनाने के लिए, धरती पर जीने वाली मानवता में से और भी ज़्यादा लोगों को ईश्वर-चेतना के प्रति जागकर दिव्य मनुष्य के रूप में सक्रिय होने की ज़रूरत है।

एक दिन सब ऐसे बनेंगे, पर हाथ पर हाथ धरे उस समय का इंतज़ार भर करने से वास्तविकता नहीं बदलती, यह तो समझते हो न।

इसलिए तुम लोगों में से हर एक का अस्तित्व महत्वपूर्ण है।

क्योंकि तुम लोग अपने में मूल रूप से निहित ईश्वर-चेतना को प्रकट करके, दिव्यता के ही जीवन-ढंग को मानवता के सामने उद्घाटित करते जाओ, तो अभी न जागी मानवता की भी भीतरी दिव्यता अनजाने में विकसित होती है, और दिव्यता का जीवन जीने में आसान वातावरण बनता जाता है। (समाप्त)

 

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

इस ब्लॉग के संदेश, विषय के अनुसार एक पुस्तक-श्रृंखला में फिर से संजोए गए हैं।
यह श्रृंखला एक-एक खंड करके प्रकाशित की जाएगी।

Angelusbell

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वीडियो एक-एक करके जारी किए जाएँगे।

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