जब तक सूक्ष्म, सर्वव्यापी मन तुम्हारा अपना मन न बन जाए (पूर्वार्ध)
प्रकाशित अद्यतन
★असली वह है जो वर्तमान को जीवंत करके जीता है
किसी भी समय, अपना मन असली है या नकली, यह परखकर, हमेशा जीवन के सार को जीने का प्रयास करना महत्वपूर्ण है।
ऐसा क्यों कहता हूँ, तो इसलिए कि मनुष्य का सत्य, यानी वह “असली चेतना”, ज़रा-सा भी डगमगाए बिना हमेशा चमकती रहती है, लेकिन उस अवस्था से दूर की मानसिकता में जीने वाले लोग काफ़ी हैं।
इसलिए अगर तुम खुद को देखकर डगमगाते अपने आप को पाओ, तो “अच्छा, इस तरह प्रकट होने से मन में बचे डगमगाते विचार ने अपनी आयु पूरी करके जीवन के प्रकाश में लौट गया। ठीक है, अब बस अभी की चेतना का उपयोग बाकी है” यह सोचकर, जीवन-प्रकाश की उजास को जैसा का तैसा प्रकट करने वाले शब्द सोचो, बोलो और कर्म में उतारते जाओ।
इसमें महत्वपूर्ण है “इस पल” का अर्थ सही-सही समझना, क्या तुम वर्तमान को सही समझ रहे हो?
हर पल, प्रकट होकर बीतता हुआ लगने वाला वह वर्तमान पल ही, उसमें वर्तमान, अतीत और भविष्य सब भरा है, और उसे जीवंत करना हो या मार देना, यह उस व्यक्ति की अभी की चेतना के उपयोग पर निर्भर है।
फिर भी अतीत में उलझकर, वर्तमान पर विलाप करके, या भविष्य की चिंता करके, उस सुनहरे अवसर को न पहचान पाने वाले लोग बहुत हैं।
यह बात कैसे समझाऊँ, यह हमेशा सोचता हूँ, लेकिन असल में आख़िरकार, हर एक के अपने-अपने विचार, वचन और कर्म के अनुरूप जागरण की सही घड़ी पर ही छोड़ना पड़ता है।

★भाग्य सुधारने का अवसर अभी है
लेकिन उसी भौतिक जगत में जी रहे तुम लोग, उनके जागने का समय जल्दी लाने के लिए सहारा और समर्थन दे सकते हो।
इसलिए ऐसे सहायक एक भी अधिक हों, इसके लिए दूसरी, तीसरी बार कहता हूँ, तुम लोग जिसे अभी मानते हो वह “वर्तमान” सही कहें तो वर्तमान नहीं, बल्कि स्वयं “अतीत” का फल और स्फटिक है, और अभी जो सोचते, बोलते और करते हो, वही सीधे भविष्य का भाग्य बनकर प्रकट होता है।
भाग्य को हमेशा उसी पल बदला जा सकता है।
भाग्य नहीं बदला जा सकता, यह किसने तय किया?
वह कौन है, कहाँ का है?
या यह सोचते हो कि यह कोई नियम है?
और कोई नहीं, स्वयं तुमने ही “भाग्य नहीं बदला जा सकता” इस कठोर धारणा की जेल बनाकर, अपने मन को क़ैद कर रखा था।
यह बात इतनी महत्वपूर्ण है कि “बहुत” शब्द कितनी भी बार लगाओ, कम पड़े, इसलिए अगर कोई भाग्य को न बदला जा सकने वाला मानता आया हो, तो अपने मन में अच्छी तरह गहरे उतरकर सोचकर देखे।
जिन्हें इस प्रश्न का उत्तर पता है, वे पहले ही एक के बाद एक वर्तमान को जीवंत करके उसे फिर से रंगते हुए, उज्ज्वल भाग्य का सृजन कर रहे हैं।
यहाँ सब लोगों को दिल की गहराई से समझ लेना चाहिए।
कि अपने विचारों की अवस्था का अपने भाग्य से गहरा संबंध रहा है। यह खुद को दोष देने के लिए नहीं, बल्कि यह जानने के लिए है कि अभी से भाग्य बदल सकने की शक्ति अपने भीतर है। (अगली बार जारी)






