“We” “Our” “Us” के स्वाभाविक होने वाली चेतना में रूपांतरित होने के लिए-8
प्रकाशित अद्यतन
अंकों से खोलकर देखा गया चेतना का झुकाव
अच्छा-बुरा, पसंद-नापसंद, प्रेम करना-न करना, क्षमा करना-न करना, स्वीकार करना-न करना, सम्मान करना-न करना, इस तरह मन में दो ध्रुवों में बँटे हर स्व को, इस तरह धन-ऋण अंकों में व्यक्त किया जा सकता है।
<अंकों में व्यक्त चेतना-संतुलन का एक उदाहरण-1>
क्षमा करने की भावना = +3
क्षमा न करने की भावना = -20
(+3) + (-20) = -17
क्षमा करने की भावना = +20
क्षमा न करने की भावना = -2
(+20) + (-2) = +18
*********************
प्रेम करने की भावना = +4
प्रेम न करने की भावना = -30
(+4) + (-30) = -26
प्रेम करने की भावना = +25
प्रेम न करने की भावना = -3
(+25) + (-3) = +22
ये अंक देखकर, बहुत से लोग ऐसा सोचेंगे।
“उत्तर ऋणात्मक हो तो अच्छा नहीं, लेकिन धनात्मक हो तो ठीक है न?”
लेकिन, मनुष्य की चेतना वास्तव में धनात्मक की ओर झुके या ऋणात्मक की ओर, दोनों में संतुलन रहित चेतना-अवस्था बन जाती है।
क्यों, तो इसलिए कि “क्षमा न करना” की ओर झुको तो कहने की ज़रूरत ही नहीं कि ख़ुद ख़ुद को दोष देते रहते हो, और “प्रेम करना” की ओर बहुत ज़्यादा झुको तो अक्सर, बहुत ज़्यादा प्रेम के कारण आसक्ति से ख़ुद को भी दूसरों को भी जकड़ देते हो।

चेतना का संतुलन सँवारने वाला सूत्र
इसलिए ज़रूरी हो जाता है, चेतना के झुकाव को संतुलित करके, न दाएँ न बाएँ, न ऊपर न नीचे, न आगे न पीछे बहुत ज़्यादा झुकने वाली चेतना की दृष्टि रखना।
मनुष्य की चेतना अभी के उदाहरण की तरह, पूरी तरह अंकों में व्यक्त की जा सकती है।
इसलिए, संतुलन सँवारने वाली चेतना का ढंग भी सूत्र से व्यक्त किया जा सकता है।
इस तरह।
<अंकों में व्यक्त चेतना-संतुलन का एक उदाहरण-2>
क्षमा करने की भावना = +3
क्षमा न करने की भावना = -20
(+3) + (-20) × 0 = 0
क्षमा करने की भावना = +20
क्षमा न करने की भावना = -2
(+20) + (-2) × 0 = 0
*********************
प्रेम करने की भावना = +4
प्रेम न करने की भावना = -30
(+4) + (-30) × 0 = 0
प्रेम करने की भावना = +25
प्रेम न करने की भावना = -3
(+25) + (-3) × 0 = 0
देखो, शून्य से गुणा करो तो, धनात्मक हो या ऋणात्मक, हर उत्तर शून्य हो जाता है न।
इसी तरह अंक 0 (शून्य, “रेई”), जापानी में उसी तरह उच्चारित होने वाले [रेई, यानी आत्मा] का अर्थ भी रखने वाली संख्या है।
आत्मा का अर्थ है, दृश्य जगत में वास्तविक घटनाक्रम शुरू होने से पहले की अवस्था।
और यही ऊपर से समग्र देखने वाली दृष्टि, बर्ड आइज़ व्यू की स्थिति है।
इसलिए जो यह चेतना की दृष्टि पाना चाहते हैं, वे चेतना के झुकाव को रीसेट करने के लिए, अब तक की अपनी भावनाओं को शून्य (आत्मा) की चेतना से गुणा कर दें, बस।
ऐसा करो तो, पूर्वाग्रह और ज़िद, जल्दबाज़ी के फ़ैसले और आसक्ति जैसी बंधन वाली भावनाएँ पतली होने लगती हैं। (अगली बार जारी)






