पृथ्वी के भविष्य को चमकाने के लिए (उत्तरार्ध)
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(पिछली बार से जारी)
★नए मूल्यों के आधार पर
यह तथ्य है कि पिछले कुछ सौ वर्षों में पृथ्वी का वातावरण बहुत घायल हुआ है।
और वह भी मनुष्य के कामों के परिणाम के रूप में।
जीवों की बात करें, तो केवल जानवर ही नहीं, बाकी जीवित चीज़ें भी, जैसे मुख्य रूप से पौधे भी, मूल प्रजातियाँ तेज़ी से ख़त्म हो रही हैं, और पारिस्थितिकी-तंत्र का विनाश आँखें मूँद लेने लायक स्थिति तक पहुँच गया है।
हवा, पानी, धरती, सारी प्रकृति की भी यही हालत है।
अपने ग्रह के वातावरण के प्रति ज़िम्मेदार पृथ्वी-नागरिक के एक सदस्य के रूप में, हर पृथ्वीवासी अपनी क्षमता के दायरे में क्या कर सकता है, क्या कोई योगदान दे सकता है, इस पर अच्छी तरह सोचे, और जो कर सके उससे अपना व्यवहार बदलता जाए, तो अच्छा है।
अमेरिका के राष्ट्रपति अकेले के बदलने से काम नहीं चलेगा।
इसलिए कहा जा सकता है कि सबसे महत्वपूर्ण बात है हर एक पृथ्वीवासी का बदलना।
इस बात पर अभी बहुत से पृथ्वीवासियों का ध्यान नहीं गया है।
ऐसे में भी तुम लोग, पृथ्वी के भविष्य में आशा देखते हो, और कितनी भी निराशाजनक स्थिति में कभी हार न मानने वाला मन रखते हो।
वह इसलिए कि तुम लोग मनुष्य के सार में दिव्यता को स्वीकार करते हो।
मानवता के सार में दिव्यता को स्वीकार करना ही पृथ्वी के आगे बढ़ने की शक्ति बनता है।

इसलिए हम, ऐसे सत्य को समझ सकने वाले पात्र यानी तुम लोगों के भीतर रहकर, तुम लोगों के साथ काम कर सकते हैं।
कभी-कभी कहता हूँ, पृथ्वी की नियति कभी भी केवल पृथ्वी नाम के एक ग्रह का मामला नहीं है, वह पूरे ब्रह्मांड पर भी असर डालती है।
अभी भी बहुत से पृथ्वीवासी ऐसे जीते हैं मानो ब्रह्मांड में मानवता केवल वे ही हों, लेकिन वह भी बस इसलिए कि वे अभी जानते नहीं, और इस बारे में आगे चलकर धरती-आकाश हिला देने वाली घटनाएँ होंगी, इसलिए उसकी प्रतीक्षा का आनंद लो।
वह बात एक ओर, पृथ्वी की बात का निपटारा पृथ्वीवासी ही करें, यही मूल बात है, इसलिए अपने से हो सकने वाला सबसे अच्छा करते हुए, हर दिन जीवन को जलाकर जीना होगा।
जैसा हमेशा कहता हूँ, तुम लोग ही पृथ्वी के भविष्य को रोशन करने वाले महत्वपूर्ण दीपक हो।
यह एक निर्विवाद तथ्य है।
यह तो आत्मिक तथ्यों को खोले बिना भी, भौतिक आम समझ वाले दिमाग से सोचो तो भी समझ में आने वाली बात है, है न।
बहुत से पृथ्वीवासी अभी अपने ही कामों में उलझकर जी रहे हैं।
उसका दायरा थोड़ा बड़ा भी हो, तो परिवार की बात, और जिनसे लेन-देन का संबंध है उनकी बात, बस इतना ही, है न।
जब देशों के नेता तक ऐसे हैं, तो यह स्वाभाविक ही है।
इस तरह देखो, तो समझ में आता है न कि तुम लोग कितने अनोखे लोग हो।
अच्छे अर्थ में।
तुम लोग पृथ्वी के, नहीं, ब्रह्मांड के ख़ज़ाने हो।
थोड़ा और आगे का भविष्य आने पर, वह समय आएगा जब हर किसी की आँखों के सामने साफ़ हो जाएगा कि तुम लोगों के होने के कारण ही पृथ्वी आशा खोए बिना यहाँ तक आ पाई।
इसलिए वह निःस्वार्थ, निर्मल प्रार्थनामय हृदय भूले बिना, पृथ्वी के भविष्य पर प्रकाश डालो।
तुम लोगों के ज़रिए हम भी साथ देने वाला प्रकाश डाल रहे हैं।
बस थोड़ा और धैर्य रखना है। (समाप्त)







