सामग्री पर जाएँ

तारों के साथ संवाद के युग का द्वार खोलने के लिए

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

Voice of Space Brothers

मानसिक रोग का असली कारण, और सच्चा समाधान स्थापित होने तक सँभालने का तरीका (पूर्वार्ध)

प्रकाशित अद्यतन

★मानसिक रोग का कारण

अभी पृथ्वी पर बहुत से लोग अपने मन को नियंत्रित न कर पाने से पीड़ित हैं।

कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें पीड़ा का बोध तक नहीं और वे बस भावनात्मक विचारों के बहाव में चल रहे हैं, लेकिन जिन्हें यह बोध है कि अपना मन होते हुए भी वे उसे खुद नियंत्रित नहीं कर पाते, और कुछ करना चाहते हुए भी कुछ नहीं कर पाते, उन्हें भी मिला लें, तो खुद को नियंत्रित न कर पाने वालों की संख्या पूरी पृथ्वी पर करोड़ों से भी अधिक है।

और मन के रोगों के बारे में आज की पृथ्वी की चिकित्सा में भी अभी बहुत कुछ अज्ञात है, और डॉक्टर और शोधकर्ता पूरी लगन से उस पर काम कर रहे हैं।

हमारी दृष्टि से उससे अलग एक कोण भी दिखता है।

चिकित्सा के क्षेत्र में, लक्षणों को कम करके व्यक्ति और उसके परिवार के जीवन को सहारा देने वाला उपचार बड़ी सावधानी से किया जा रहा है।

इसलिए उपचार ठीक से लेते रहना। इसके साथ, हम आत्मिक पहलू की बात करना चाहते हैं।

तो, हमारी दृष्टि से देखें, तो उसकी गहराई में कभी-कभी आत्मिक बाधा, यानी तथाकथित आत्मिक उपद्रव भी जुड़ा होता है।

मोटे तौर पर कहें, तो इसमें केवल परलोक की चीज़ें ही नहीं, बल्कि जीवित मनुष्यों के विचार (जीवित आत्मा) भी शामिल हैं, और जब ऐसे मेल खाती तरंग-लंबाई वाले दूसरों के विचार-तरंग रेडियो या वायरलेस में जैमिंग की तरह भीतर बहकर आते हैं, तो उस व्यक्ति की मस्तिष्क-तरंगें अस्त-व्यस्त हो जाती हैं, और वह आम तौर पर अजीब लगने वाली बातें सोचने या करने लगता है।

और जब यह केवल व्यक्तिगत उलझन या पीड़ा जैसा हल्का लक्षण नहीं, बल्कि ऐसी स्थिति हो कि उस व्यक्ति को मानसिक अस्पताल में भर्ती किए बिना आसपास के लोगों का चल ही न सके, तो हम देखते हैं कि उसमें अक्सर परलोक के अमुक्त विचारों का प्रभाव जुड़ा होता है।

इसका क्या अर्थ है, तो जब जीवन के मूल स्रोत का प्रकाश सिर के शिखर वाले चक्र के रास्ते शरीर में भरपूर आ रहा हो, तब दूसरे विचारों द्वारा शरीर पर क़ब्ज़ा हो जाना संभव ही नहीं, लेकिन जब ऐसा न हो, तब शरीर पर क़ब्ज़ा होने की दरार बन जाती है, और उस दरार से इस संसार में ठिकाना ढूँढ़ने वाली अमुक्त सूक्ष्म आत्माएँ भीतर घुसकर उस व्यक्ति के शरीर को मनमाने ढंग से चलाने की कोशिश करती हैं।

तब जिसमें वे घुसी हैं, वह व्यक्ति कभी-कभी अपनी मूल इच्छा से बिल्कुल अलग वचन और कर्म कर बैठता है।

लेकिन वह उस व्यक्ति का सच्चा रूप नहीं है।

★दूसरों के बारे में सोचने के समय में खुद को निखारो

आकाश और धरती के बीच के अनगिनत जीवों में, मनुष्य जितना जटिल बना हुआ, रहस्यमय जीव कोई नहीं।

जीवन की संरचना तो है ही, और इस तरह अमुक्त लोक के जीवों द्वारा चेतना का नियंत्रण छीन लिए जाने पर भी, उसका रूप धरने की कोशिश करने वाली चेतना से जूझते हुए भी, किसी तरह जीवन बचाए जी रहा होता है।

तो, ऐसे लोगों में भी दिव्यता है, यह तो समझ आता है न।

लेकिन अगर तुम्हारे किसी निकट के व्यक्ति में ऐसा कोई हो, तो दिखावटी बातें नहीं, क्या तुम सचमुच दिल की गहराई से उस व्यक्ति से प्रेम कर सकते हो, उसके भीतर निहित दिव्यता को स्वीकार कर सकते हो।

कहा जा सकता है कि उसी में हमारी अपनी सच्ची योग्यता प्रतिबिंबित होती है।

अगर केवल बुरा ही सोच पाओ, तो वह भी ठीक है।

वह अवस्था ईमानदारी से अपनी वर्तमान स्थिति को उजागर कर रही है, है न।

इस तरह अपनी वर्तमान स्थिति को ईमानदारी से स्वीकार करना ही चेतना के विकास का पहला कदम है।

क्योंकि वहीं से होकर ही चेतना के विकास के सच्चे मार्ग में प्रवेश किया जा सकता है।

तो अगर अभी तुम्हारी चेतना की अवस्था नीची है, तो बस ऊपर उठते जाना है, और ऊँची है तो और ऊँचाई का लक्ष्य रखकर मन को निर्मल और शुद्ध करते जाना है।

कहना क्या चाहता हूँ, तो दूसरों को आँककर विचारों को अँधेरा करने का समय हो, तो उसे खुद को निखारने और ऊँचा उठाने का दर्पण बना लो।

जैसा हमेशा कहता हूँ, मनुष्य को सच में बचाने वाली चीज़ अपनी इच्छा के सिवा कुछ नहीं।

दूसरे जो कर सकते हैं, वह है साथ देना, चुपचाप जीवन के प्रकाश से पीठ थपथपाना, और सार्वभौमिक सत्य पर टिकी चेतना की दृष्टि वह अपना सके, इसके लिए अँधेरे मन में प्रकाश जलाना, बस इतना ही। (अगली बार जारी)

 

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

इस ब्लॉग के संदेश, विषय के अनुसार एक पुस्तक-श्रृंखला में फिर से संजोए गए हैं।
यह श्रृंखला एक-एक खंड करके प्रकाशित की जाएगी।

Angelusbell

वीडियो जल्द आ रहे हैं

वीडियो एक-एक करके जारी किए जाएँगे।

星々の仲間入りを果すために

YouTube चैनल पर जाएँ