पृथ्वी-संसार को बहुत बदलने वाले निर्णायक बिंदु की ओर (पूर्वार्ध)
प्रकाशित अद्यतन
★तारे जैसी जीवन-शैली वाले लोगों की माँग है
पृथ्वी को आज सबसे अधिक जिसकी ज़रूरत है, वह है सूर्य जैसा काम करने वाले लोग।
जब पृथ्वी की कुल आबादी का 1% या 2% तारे जैसी जीवन-शैली में बदल जाएगा, तब पृथ्वी-संसार बहुत बदल जाएगा।
शायद पहले भी कहा हो, ब्रह्मांड से पृथ्वी की मानवता के मन-क्षेत्र के संसार को देखो, तो वह सचमुच घोर अंधकार है।
ऐसा क्यों है, क्योंकि पृथ्वी पर 99% से अधिक लोग खुद को “भौतिक, अलग-थलग अस्तित्व” मान बैठे कर्म-विचारों के बादलों से, मन के सूर्य यानी “जीवन के प्रकाश” को ढके हुए जी रहे हैं।
तो, ब्रह्मांड के सार्वभौमिक सत्य से देखें, चेतना के इस उपयोग के सुधरते जाने से आज की सतही उथल-पुथल भी सुधरती जाती है।
यहीं तुम्हारा अस्तित्व और तुम्हारा काम उभरकर आता है।
सतही चेतना से समझ में न आए, लेकिन तुम्हारा अस्तित्व अंधकार के पृथ्वी-संसार में प्रकाश जलाने का काम कर रहा है।
सूर्य कोई बदला चाहे बिना सभी जीवों को पालता और जीवित रखता है न?
और पृथ्वी पर जीवन वाले सभी अस्तित्व, सूर्य न हो तो स्वस्थ जीवन नहीं चला सकते।
अभी कहा था, पूरी पृथ्वी के मन-संसार को देखो, तो जीवन-सूर्य काले बादलों में छिपा है, बिल्कुल नहीं चमक रहा, इसलिए आधी रात के अंधकार जैसा घोर अंधकार हो गया है।

★तुम पृथ्वी को पुनर्जीवित करने वाले देवदूत हो
ऐसे संसार में तुम, अपनी-अपनी दिव्यता के विकास की मात्रा के अनुसार अलग-अलग, लेकिन सड़क की बत्ती या प्रकाश-स्तंभ जैसा काम, या क्षेत्र को रोशन करने का काम कर रहे हो।
जहाँ तुम चमक रहे हो, वह जगह इतनी उजली है कि रात में हल्का-हल्का दिख सके, इसलिए लोग किसी न किसी तरह जी पा रहे हैं।
अगर आज पृथ्वी-लोक की चेतना के विकास को खींचने वाले तुम पृथ्वी छोड़कर किसी और तारे पर चले जाओ, तो पृथ्वी का मन-संसार कहीं अधिक अँधेरा होकर बहुत कठिन स्थिति में पड़ सकता है।
इतना महत्वपूर्ण है तुम्हारा प्रकाश।
लेकिन चिंता की कोई बात नहीं।
तुम्हारा मूल रूप पृथ्वी को ऐसा न होने देने के लिए जन्मे देवदूत का है।
यह सुनकर भी बहुत से लोग शायद सोचें, “मेरे जैसा देवदूत, यह तो बेतुकी बात है।”
लेकिन यह निर्विवाद तथ्य है।
क्योंकि केवल तुम्हारे होने भर से दुनिया की बड़ी विपत्तियाँ छोटी में और छोटी विपत्तियाँ शून्य में बदल रही हैं। (अगली बार जारी)






