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तारों के साथ संवाद के युग का द्वार खोलने के लिए

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

Voice of Space Brothers

मन की शांति स्थापित करें (पूर्वार्ध)

प्रकाशित अद्यतन

★मन की शांति स्थापित करने के लिए

किसी भी और बात से पहले, अपने मन की शांति स्थापित करने का प्रयास करो।

मुख्य बात यह है कि दिखावे की परवाह किए बिना जियो।

अपनी इज़्ज़त या सुविधा, पूर्वाग्रह या ज़िद, आसक्ति या मान्यताएँ, ऐसी बातों में बँधकर, दूसरों की आलोचना में मन खपाना बर्बादी है।

“मैं, मैं, मैं, मैं” कहते हुए, भौतिक शरीर से बिल्कुल चिपके अहं के विचारों को जीवन का अधिकार सौंपकर, जीवन के प्रकाश की स्वस्थ गूँज को धुँधला करने जितनी बर्बादी और कुछ नहीं, यह दिल की गहराई से समझने की सही घड़ी अभी है।

अभी जीवन को न चमकाओ तो कब?

“कभी न कभी” कहकर, चेतना के विकास का समय टालते हुए अहं का बचाव करना, अपने ही मन-शरीर के विकास को नुकसान पहुँचाना है।

अब, धीरे-धीरे इस पर ध्यान देने का समय आ गया है।

तरह-तरह के पिछले जन्मों से आज तक, अपने बनाए कर्म का सामना करना, नज़र फेर लेने का मन करे इतना कठिन हो सकता है, लेकिन “अहा, अच्छा” कहकर सच्चा सत्य याद करने के लिए, यह न टाला जा सकने वाला रास्ता है।

★ख़राब रास्ते पर चलने का ढंग

रास्ते की बात चली तो, बताया था न कि जीवन रास्ते पर चलने जैसा है।

जब कीचड़ भरे रास्ते से गुज़रे बिना आगे न बढ़ सको, तब ख़ुद गंदा होना पसंद न होने के कारण, गंदे रास्ते के पहले ही क़दमताल करना, बैठ जाना, या ज़िद करके लोट-पोट होना, आत्मा के छोटे बच्चे की बात अलग है, लेकिन चेतना के विकास की ओर उन्मुख होने की कोशिश कर रहे तुम लोगों जैसे आत्मा के युवा को शोभा नहीं देता।

शुरू में जो कहा, “दिखावे की परवाह किए बिना जियो”, उसका अर्थ यही है।

अगर तुम सचमुच आत्मा के वयस्क हो, तो ऐसे ख़राब रास्ते पर पहुँचने पर, संकल्प लेकर निडरता से, उस कीचड़ भरे रास्ते पर सीना तानकर चलो।

लोग क्या सोचेंगे, इस बारे में सोचने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं, यह ध्यान रखना।

वैसे भी दूसरे, जितना तुम सोचते हो उतनी गहराई से तुम्हारे बारे में नहीं सोचते।

सब अपनी ही बातों में पूरी तरह लगे हैं।

दूसरों की तरह-तरह से निंदा करने वाले, या टाँग खींचने वाले काम ही करने वाले लोग भी, ध्यान से देखो तो, दूसरों की ओर ध्यान देते हुए दिखते हुए भी, वास्तव में केवल ख़ुद को मैला करते हुए, चोट पहुँचाने वाली जीवन-शैली जी रहे हैं।

तुम्हारे जीवन का सच्चा काम है, अपने आप को निखारकर ऊँचा उठाने के ज़रिए, ऐसे लोगों के मन की गहराई में, जीवन का प्रकाश जला देना।

मुँह से तरह-तरह की बातें कहने की ज़रूरत नहीं।

कर्म से दिखाओ, बस।

ऐसा करो तो, हर तरह के विचार-स्वभाव वाली पृथ्वी की मानवता, मन की गहराई में जीवन का सत्य याद करके, स्वयं अपनी दिशा सुधार सकने लगेगी।

इसलिए, किसी भी और बात से पहले, अपने मन की शांति स्थापित करना सबसे महत्वपूर्ण है, ऐसी हमेशा वाली बात बन जाती है। (अगली बार जारी)

 

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

इस ब्लॉग के संदेश, विषय के अनुसार एक पुस्तक-श्रृंखला में फिर से संजोए गए हैं।
यह श्रृंखला एक-एक खंड करके प्रकाशित की जाएगी।

Angelusbell

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वीडियो एक-एक करके जारी किए जाएँगे।

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