शाश्वत जीवन की धारा पर सवार हो जाओ (1)
प्रकाशित अद्यतन
★उज्ज्वल भविष्य तुम लोग बना रहे हो
★भले ही न मानने वाले ज़्यादा हों
निकट भविष्य की पृथ्वी-जगत ऐसी दुनिया बनेगी जहाँ सिर्फ़ दिव्यता याद करके प्रकट करने वाले लोग होंगे।
ऐसा कहने पर भी अभी शायद न मानने वाले ज़्यादा हों।
धरती के लोगों के भावों की वास्तविकता में ज़्यादातर मामले ऐसे हैं जहाँ हर कोई एक-दूसरे को ऐसा ताक़तवर मानता है जिसे आसानी से सँभाला नहीं जा सकता, अपनी बात ताक पर रखकर दूसरे के बारे में सोचता-देखता है।
इसीलिए पहचान की शक्ति सही ढंग से इस्तेमाल कर सको, इसके लिए चेतना के उपयोग के महत्व और उसके ढंग के बारे में बात करता हूँ ताकि तुम न भूलो, फिर भी बहुत-से लोग सोचते लगते हैं कि विचार-आदतों से आने वाली पहचान को बदलना कोई साधारण बात नहीं।
जब तक ऐसी पहचान सामान्य बुद्धि बनी रहे, पृथ्वी का आत्मिकीकरण बहुत धीमा रहेगा और उज्ज्वल भविष्य दूर होगा, लेकिन ऐसी सामान्य बात को लाँघकर पृथ्वी पर सिर्फ़ दिव्यता के लोगों की दुनिया बहुत जल्द आने वाली है।

★पृथ्वी के भविष्य को पूर्णता तक ले जाने वाली चीज़
इसका कारण यह है कि ब्रह्मांड के संचालन में “समय” नाम की चीज़ है, और हर तारे का विकास जब उस समय तक पहुँचता है, तब जैसे बसंत आने पर चेरी के फूल खिलते हैं, वैसे दिव्यता के फूल, जीवन के फूल भरपूर खिलते हैं।
और परदे के पीछे इस धारा को चुपचाप आगे बढ़ाने वाले गुप्त मिशन के ठेकेदार पृथ्वी पर बहुत हैं, लेकिन वे “मैं, मैं” कहने वाले आत्म-प्रदर्शन से मुक्त लोग हैं, इसलिए बहुत-से पृथ्वीवासी उनके अस्तित्व को नहीं जानते।
इसलिए यह बात किसी दिन, जब हम पूरी पृथ्वी की मानवता के सामने भौतिक रूप में प्रकट होंगे, पृथ्वी के विकास के योगदानकर्ता के रूप में हमारे प्रतिनिधि द्वारा घोषित की जाएगी।
यह किसकी बात है, यह तुम समझते हो।
तुम।
तुम लोग।
यह महत्वपूर्ण तथ्य है, तुम्हारी प्रार्थना है इसीलिए धरती और बड़ी अव्यवस्था में पड़े बिना सँभली हुई है।
इस तरह पृथ्वी को सहारा देने वाली बड़ी शक्तियों में से एक है तुम्हारी रोज़ की “मानवता की दिव्यता के पुनर्जागरण की प्रार्थना,” “प्रकृति के हर अंग के प्रति कृतज्ञता-साधना” और “पृथ्वी की शांति लाने वाली प्रार्थना।”
इसलिए असल में तुम्हें अपनी “पृथ्वी-सामंजस्य की प्रार्थना” पर और भी आत्म-विश्वास होना चाहिए।
रोज़ की ऐसी बुवाई, सिंचाई, खाद से एक दिन मानवता का बड़ा हिस्सा अपनी-अपनी दिव्यता याद करके चेतना का विकास करेगा।
उस प्रक्रिया में हम भी शामिल होंगे, लेकिन जो भी हो, पृथ्वी के महान सामंजस्य वाली पूर्ण शांत दुनिया में विकसित होने का समय आएगा। (अगली बार जारी)







