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तारों के साथ संवाद के युग का द्वार खोलने के लिए

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

Voice of Space Brothers

उत्तर कोरिया का साहसी निर्णय और राष्ट्रों का मिशन (उत्तरार्ध)

प्रकाशित अद्यतन

​ इसी नाम का पिछला लेख

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(पिछली बार से जारी)

★”बलवान ही जीतता है” वाले विचार को निष्क्रिय करने वाली शक्ति

अगर ऐसे ही चला, तो लगता है कि उन देशों के सैन्य बल से धमकाना बंद करने का समय अभी दूर है।

और बड़े देशों की मनमानी तब रुकेगी जब हम जैसे दूसरे तारों के लोग बड़ी संख्या में भौतिक रूप में प्रकट होंगे, उसके बाद।

बड़े देश कहलाने वाले देश, अपनी स्थिति बचाने के लिए, खुद परमाणु हथियार रखते हुए छोटे देशों को रखने नहीं देना चाहते।

केवल अपनी स्थिति बचाने के कारण से।

हमारी दृष्टि से यह सच्ची शांति का मार्ग नहीं, लेकिन वे मानते हैं कि सैन्य बल ही दुनिया को शांत करने का तुरुप का पत्ता है।

बल से सत्ता बनाए रखने को पहले रखने वाली उनकी सोच बदलने के लिए, उनसे बड़ी शक्ति की ज़रूरत होती है।

जब हमारी वैज्ञानिक शक्ति तुम्हारे संसार में लागू होगी, तब पृथ्वी-लोक के बड़े देश “किसी भी तरह मुकाबला नहीं” वाली हार-मान को अवसर बनाकर, आखिरकार सैन्य बल से शासन छोड़ने तक पहुँचेंगे, और आखिरकार पूर्ण शांति का पहला कदम रखेंगे।

उस समय तक पहुँचने के कई परिदृश्य हैं, लेकिन अगर पृथ्वी की मानवता की दिव्यता के विकास की गति आज से अधिक तेज़ न हुई, तो बड़े देश स्वेच्छा से परमाणु हथियार नहीं छोड़ेंगे।

अगर इसके उलट, पृथ्वी की मानवता की दिव्यता का विकास तेज़ हो, तो हमारी वैज्ञानिक शक्ति से सारे सैन्य बल को निष्क्रिय करके दिखाए बिना भी, जैसे उत्तर कोरिया ने परमाणु छोड़ने का निर्णय किया, वैसे ही बड़े देश भी साहसी निर्णय लेंगे, लेकिन ऐसा होगा या नहीं, यह केवल तुम्हारी चेतना के विकास की प्रगति पर निर्भर है।

चेतना का विकास करना है दिव्यता को सतह पर लाकर सामंजस्य की ओर उन्मुख विचार, वचन और कर्म करना और प्रकट करना।

★छोटे मतभेदों में जकड़े बिना बड़ी साझा बात को बाँटें

इसे आसानी से दिखाया इस बार उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता ने।

किम जोंग-उन का मन इस वर्ष के आरंभ के बाद से कर्म-विचारों से अधिक दिव्य चेतना की प्रधानता में बदलता गया।

इस तरह उनकी चेतना को बदलने वाली चीज़ थी तुम्हारी रोज़ की दिव्यता के पुनर्जागरण की प्रार्थना।

अत्यंत महान प्रकाश वाले जीवन के मूल स्रोत के प्रकाश में तुम्हारे हाकु-तत्व को मिलाकर कोमल आवरण में लपेटे गए स्नेहमय जीवन-प्रकाश ने, कर्म का कोट पहने किम जोंग-उन के मन को, भले ही अस्थायी रूप से, अंधकार के शासन से बाहर निकाला।

फ़िलहाल, अगर जापान सहित आसपास के देश उनके साहसी निर्णय को न रौंदें, तो कोरियाई प्रायद्वीप के एकीकरण का मार्ग खुला है।

अपनी गलती स्वीकार करके दिशा सुधारना बहुत साहस की बात है न?

उत्तर कोरिया ने यह किया, इसे, बाकी गलतियाँ हों भी, स्वीकार करना चाहिए।

मनुष्य की नज़र अनायास अपनी से अधिक दूसरों की गलती पर जाती है न?

छोटे मतभेद छोड़कर बड़ी साझा बात बाँटनी है।

बड़ी साझा बात है पृथ्वी-संसार को शांत बनाना, केवल यही।

शांति बनाने की प्रज्ञा को ही सब इकट्ठा करके मिलाएँ।

हर देश का मिशन और अस्तित्व का अर्थ

इसी के लिए राजनीति है।

जापान के और हर देश के राजनेताओं को भी अभी दुनिया की ओर देखना चाहिए।

देश के भीतर के छोटे मतभेदों में जकड़ने के बजाय दुनिया की ओर हाथ बढ़ाना है।

दुनिया की शांति के लिए खुद को समर्पित करना ही हर देश का, और जापान का भी, मिशन है।

यही किसी भी राष्ट्र के अस्तित्व का महत्वपूर्ण अर्थ है।

इतनी तैयारी के साथ राजनीति में लगने वाले लोग बढ़ें, तो राजनीति का ढंग भी बहुत बदल जाएगा।

वह समय आने तक, हर एक नागरिक को लगन से दिव्यता के विकास में लगना है।

क्योंकि पृथ्वी का अस्तित्व बना रहना मानवता की चेतना के विकास पर निर्भर है। (समाप्त)

 

 

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

इस ब्लॉग के संदेश, विषय के अनुसार एक पुस्तक-श्रृंखला में फिर से संजोए गए हैं।
यह श्रृंखला एक-एक खंड करके प्रकाशित की जाएगी।

Angelusbell

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वीडियो एक-एक करके जारी किए जाएँगे।

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