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तारों के साथ संवाद के युग का द्वार खोलने के लिए

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

Voice of Space Brothers

निम्न आत्माओं की फुसफुसाहट से धोखा न खाने के लिए (पूर्वार्ध)

प्रकाशित अद्यतन

★क्या असेंशन में बाधा डालने वाले देव-बुद्ध हैं

“मैंने ऐसी बात सुनी है कि ‘पृथ्वी का असेंशन ब्रह्मांड के संचालन में तय हो चुकी बात है इसलिए पलटेगी नहीं, पर कुछ देव-बुद्ध सोचते हैं कि पृथ्वी के लोगों के असेंशन करने पर उनका काम ख़त्म हो जाएगा और मज़ा नहीं रहेगा, और वे पृथ्वी-लोक के असेंशन को टाल रहे हैं, इसलिए इस तारे पर असेंशन पूरा होने का दिन फ़िलहाल नहीं आएगा’; क्या यह सच है?” ऐसा प्रश्न आया था, इसलिए आज “क्या अपनी सुविधा के लिए असेंशन को टालने वाले देव-बुद्ध हैं” इस बारे में समझाता हूँ।

ऐसी सही-सी लगने वाली बात ईश्वर के नाम पर बताने वाले, “निम्न आत्माएँ, सूक्ष्म लोक के जीव” हैं, ऐसा मानो तो लगभग ग़लती नहीं होगी।

★देव-बुद्ध या अंतरिक्ष के भाइयों के नाम का इस्तेमाल करने वाली निम्न आत्माओं के जाल में न फँसने के लिए

ऐसी बातें पहले ही 50 साल से ज़्यादा समय से बताई जा रही हैं, पर जब पृथ्वी का स्पंदन आत्मिकीकृत होता है, तब जिनकी सूक्ष्म देह बड़ी है, उन पर आत्माओं का उतरना आसान हो जाता है।

आम तौर पर इसे देव-आवेश कहा जाता है।

तो अगर केवल सच्चे उच्च देवता ही उतरने वाले लोग हों तो ठीक है, पर सूक्ष्म देह बड़ी होते हुए भी विचारों में आत्म-प्रदर्शन का भाव मिला हुआ पात्र (शरीर) भी बहुत हैं, और इसके ऊपर, देवलोक से पहले, भौतिक लोक के निकट सूक्ष्म लोक में भौतिक मनुष्यों को भ्रमित करने की कोशिश करने वाली अनमुक्त आत्माएँ और सूक्ष्म प्राण हैं; ये दोनों मिलकर शुरू में लिखी जैसी बातें सही-सी लगने वाले ढंग से बता रहे हैं, और उस पर, पाने वाले के लिए उसका सच-झूठ पहचानना कठिन है, इसलिए ऐसी ग़लत जानकारी सत्य की तरह कही जा रही है, यही बात है।

इसलिए असल में, जो आत्मिक अस्तित्वों से संवाद कर सकता है, उसे प्रसिद्ध संत आदि के नाम का इस्तेमाल करने वाले, नामी देव-बुद्ध के नाम का इस्तेमाल करने वाले, ○○ देवदूत या सही-से लगने वाले नाम के तारामंडल से आने का दावा करने वाले नक़ली अंतरिक्ष के भाइयों के शब्दों को पूरी तरह नकार देना ही होगा, और उन्हें आसानी से न मान लेना महत्वपूर्ण है।

ऐसे नाम के मूल्य से भौतिक मनुष्यों की कृपा-दृष्टि पाने की कोशिश निम्न आत्माओं का घिसा-पिटा तरीक़ा है।


और पूरी तरह नकारने के बाद, “मेरा मन सच्चे स्व के साथ सदा एक हो,” “मुझे गहरे प्रेम वाला बना दीजिए,” “मैं संरक्षक आत्माओं और संरक्षक देवताओं के साथ एक होऊँ,” ऐसी प्राणपण से प्रार्थना करना भी मत भूलना।

ऐसी प्रक्रिया से गुज़रे बिना, प्रकट हुई आत्मिक शक्ति को ख़ुश होकर स्वीकार कर लो और तुरंत इस्तेमाल करने की कोशिश करो, तो सूक्ष्म लोक के जीवों से भ्रमित होना आसान हो जाता है।

इसके अलावा यह भी कहूँ कि भौतिक मनुष्य की रक्षा करने वाले संरक्षक देवता और आत्माएँ भी, जब तक सतही चेतना एक निश्चित चरण का दिव्यीकरण न पा ले, तब तक रूप-आकार में प्रकट नहीं होते, और केवल आवाज़ से संदेश भी नहीं देते, इसलिए सावधानी ज़रूरी है।

दुनिया में ऐसी क़िस्म की अनिश्चित जानकारी सत्य की तरह कही जा रही है, यह बहुत जगह दिखता है, है न।

ऐसी चीज़ें निम्न आत्माओं से भ्रमित हो चुके लोगों की, अपने को स्वीकार करवाने की चाह का प्रकट रूप हैं, या अधिकार दूसरों को सौंप देने का रूप हैं, ऐसा कहा जा सकता है। (अगली बार जारी)

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

इस ब्लॉग के संदेश, विषय के अनुसार एक पुस्तक-श्रृंखला में फिर से संजोए गए हैं।
यह श्रृंखला एक-एक खंड करके प्रकाशित की जाएगी।

Angelusbell

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