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तारों के साथ संवाद के युग का द्वार खोलने के लिए

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

Voice of Space Brothers

असेंशन की सफलता-विफलता मानवता की चेतना के विकास पर निर्भर है

प्रकाशित अद्यतन

★असेंशन के बारे में ग़लतफ़हमी

तुम्हारे देश में, लगता है ऐसे लोग हैं जो किसी की सुनी-सुनाई बात से “अब असेंशन होगा और बहुत दूर नहीं, निकट भविष्य में पृथ्वी सामंजस्यपूर्ण तारा बन जाएगी, ऐसा लगता है” जैसा सोचते हैं या दूसरों को बताते हैं।

ये शब्द सरसरी तौर पर सुनो तो सही-से लगते हैं, पर असल में यह एक बड़ी ग़लतफ़हमी पर आधारित अफ़वाह है, क्या तुम इसे तुरंत पहचान सके?

पृथ्वी-लोक को सचमुच शांतिपूर्ण तारे के रूप में नया जन्म लेने के लिए पूरी मानवता को अपनी भीतरी दिव्यता को पुनर्जीवित करना होगा, है न।

और यहाँ महत्वपूर्ण बात यह है कि इस दिव्यता को पुनर्जीवित करना कुछ किए बिना अपने आप बदलने वाली चीज़ नहीं; संबंधित व्यक्ति के प्रयास से बदलने (सार को याद करके दिव्यता में लौटने) के सिवा कोई रास्ता नहीं।

कोई तुम्हारी जगह असेंशन कर दे, यह भी असंभव है, और जैसे राज्य किसी व्यक्ति का पूरा क़र्ज़ माफ़ कर दे (क़र्ज़-माफ़ी के फ़रमान की तरह), वैसे पिछले जन्मों से जमा कर्म को रद्द कर देने वाला कोई देव-बुद्ध भी नहीं है।

यह, बेशक, हमारे लिए भी असंभव बात है।

ऐसा असेंशन, जिसमें हर कोई बिना शर्त बच जाए और नैतिक शिथिलता पैदा होने का ख़तरा हो, संभव नहीं है, यही बात है।

जिसने गंभीरता से जीवन के मूल स्रोत की दिव्यता को प्रकट करने का प्रयास करते हुए जीवन जिया, उसकी यात्रा ठीक से उस व्यक्ति की चेतना की गहराई के रूप में फलती है।

हर एक व्यक्ति की यात्रा ज्यों की त्यों सँभालकर रखी जा रही है।

ब्रह्मांड के हृदय की जीवन-नैतिकता पर आधारित नियम में सही प्रयास को ज़रूर फल देने की व्यवस्था है, और जब कोई भी खुद सही रास्ते पर चलना शुरू करता है, तब वह द्वैत के टकराव की दुनिया से निकलता जा सकता है, ऐसी व्यवस्था है।

★असेंशन होगा या नहीं, यह मानवता पर निर्भर है

और मूल की बात करें, तो असेंशन होने वाली चीज़ नहीं, करने वाली चीज़ है; पृथ्वी-लोक को असेंशन कराना या न कराना, इस पर निर्भर है कि तुम पृथ्वी की मानवता में से हर एक चेतना के विकास का चुनाव तय करके उसे कर्म में उतारता है या नहीं।

इसके सिवा और कुछ भी नहीं।

ऐसे सत्य (सच) को हर कोई समझ ले, वह समय जल्दी आए, इसके लिए पूरी मानवता की चेतना के विकास को सही दिशा में ले जाना ही तुम लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो दिव्यता को सुलाए रखी मानवता से आगे बढ़कर चेतना के विकास का महामार्ग खोल रहे हो।

यह भी हमेशा कहता हूँ, पर इसका मतलब यह नहीं कि कंधे तानकर, ज़ोर लगाकर कुछ करने की ज़रूरत है।

तुम लोग बस धरती पर भौतिक देह रखकर, वहाँ दिव्य स्पंदन को धरती पर विकीर्ण करने वाली कोतोदामा की गहरी साँस लेते हुए, अपनी-अपनी जगह रोज़ की आजीविका करते हुए जीते रहो, इतना ही काफ़ी है।

तब बाक़ी सब कुछ पृथ्वी-लोक के देवता और हम मिलकर अच्छी तरह चलाते जाएँगे।

ठोस रूप में, पूरी मानवता के संरक्षक देवताओं और आत्माओं के साथ मिलकर, तुम लोगों के निःस्वार्थ शरीर के भौतिक-प्राण स्पंदन को लेते हुए, उसे ब्रह्मांडीय जीवन के मूल स्रोत के स्पंदन से मिलाकर, विश्व-मानवता के हर एक व्यक्ति के मन-शरीर में बाँटकर, दिव्यता के पुनर्जागरण का छेद खोलते जाएँगे।

ठीक है?

देर-सबेर हर किसी के चेतना के विकास का समय आएगा।

ऐसा हो, इसके लिए हर किसी के मन की गहराई में मानवता के हर एक व्यक्ति का हायर सेल्फ़ मन की गहराई की गहराई से अपने को दिशा दे रहा है।

सतही चेतना वाली मानवता नहीं जानती, बस।

अब देखते रहो।

अच्छे अर्थ में चौंका देने वाली, आकाश-धरती हिला देने वाली घटना धरती पर प्रकट होगी……।

पर उसे प्रकट करना भी आख़िर तुम लोगों के होने से ही है, इसलिए हम एक ही उद्देश्य के लिए, एक ही लक्ष्य की ओर काम करने वाले तुम लोगों के पवित्र मन-शरीर को पूरी शक्ति से सहारा देते हैं।

ब्रह्मांडीय पैमाने पर महान सामंजस्य की दुनिया की पूर्णता के लिए भी।

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

इस ब्लॉग के संदेश, विषय के अनुसार एक पुस्तक-श्रृंखला में फिर से संजोए गए हैं।
यह श्रृंखला एक-एक खंड करके प्रकाशित की जाएगी।

Angelusbell

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वीडियो एक-एक करके जारी किए जाएँगे।

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