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तारों के साथ संवाद के युग का द्वार खोलने के लिए

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

Voice of Space Brothers

विज्ञान का विकास और असेंशन (पूर्वार्ध)

प्रकाशित अद्यतन

★ब्रह्मांडीय जीवन-विज्ञान (जीवन-भौतिकी, दिव्य-आत्मा विज्ञान) पूर्णता की कुंजी है

हमारे समाज और तुम लोगों के समाज के बीच सबसे बड़े अंतरों में से एक है ब्रह्मांडीय जीवन-विज्ञान का होना या न होना।

हमारी दुनिया में जिसे विज्ञान कहते हैं, वह पृथ्वी पर साधे जा रहे तरह-तरह के विज्ञान……, भौतिकी, गणित, रसायन, जीव-विज्ञान, अंतरिक्ष-विज्ञान, मानविकी, तरह-तरह की अनुप्रयुक्त इंजीनियरिंग वग़ैरह के साथ, पृथ्वी के विज्ञान में अभी न खोजे गए ब्रह्मांड के मूल स्पंदन को उद्घाटित करने वाली जीवन-भौतिकी और आयाम की गहराई को स्पंदन से स्पष्ट करने वाले दिव्य-आत्मा विज्ञान तक को समेटे हुए है; गणित भी पृथ्वी के गणित की अवधारणा से देखें तो अकल्पनीय, आयाम की गहराई तक का विश्लेषण कर सकने वाला है; और इनके एकीकरण से हर भौतिक स्पंदन और मानसिक स्पंदन को स्वच्छंद रूप से काम में लाया जा सकता है, और सब मिलकर ब्रह्मांड का सृजन पूरा करते जाते हैं, ऐसी स्थिति है।

तो हमारी दुनिया के विज्ञान को दूसरे कोण से आसानी से समझाएँ, तो तुम लोगों की दुनिया का विज्ञान अगर समतल दुनिया का विज्ञान है, तो हमारी दुनिया का विज्ञान त्रिआयामी में आयाम की गहराई जोड़ा हुआ विज्ञान है, ऐसा कहा जा सकता है।

जिसकी चेतना शरीर से पूरी तरह चिपकी हो और जो केवल क्षैतिज फैलाव वाली दुनिया की अवधारणा के धरातल पर जी रहा हो, उसे ऊर्ध्व फैलाव तो दूर, आयाम की गहराई का फैलाव भी है, ऐसी बात शायद बेतुकी लगे; पर एक दिन पृथ्वी पर भी हमारे समाज में सहज रूप से इस्तेमाल होने वाला ब्रह्मांडीय प्रज्ञा का ही विज्ञान उतारा जाएगा, यह अब पूरे ब्रह्मांड में तय हो चुकी बात है।

क्योंकि इसकी तैयारी के रूप में, पृथ्वी के एक कोने में पहले ही 50 साल से भी ज़्यादा पहले से, नियुक्त ब्रह्मांड की मानवता से ब्रह्मांडीय विज्ञान सीखते हुए, उस प्रज्ञा को पृथ्वी पर उतारने का शोध करने वाले लोग हैं।

और वह शोध सुचारु रूप से चल रहा है, और बस घोषणा करने की सही घड़ी नापने भर की स्थिति तक आ चुका है।

इस विज्ञान की सर्वशक्तिमत्ता अपनी आँखों से देख लो, तो भौतिकवाद के पक्ष में खड़े लोग भी दिव्यता के अस्तित्व के प्रति स्वाभाविक रूप से मन खोलने लगते हैं।

उस समय पृथ्वी की भौतिक दुनिया में आख़िरकार पदार्थ और मानस में प्रकट सारे स्पंदनों का रहस्य खुलेगा, और मानवता खुद उसे लागू करके, सब घटनाओं को संतुलित रूप से मिलाकर महान सामंजस्य की वास्तविकता का सृजन कर पाने लगेगी।

पृथ्वी-लोक को उस चरण तक पहुँचने के लिए अभी कई चरणों से गुज़रना है, पर उनमें भी मूल प्रेरक शक्ति यह है कि परमाणु और मूल कणों की व्याख्या से जुड़ी भौतिकी अभी से और आगे बढ़े और अज्ञात सबसे छोटे परमाणु की खोज करती जाए।

क्योंकि ब्रह्मांड का मूल स्पंदन, सबसे छोटा परमाणु, अभी पृथ्वी-लोक में ज्ञात सबसे छोटे परमाणु और मूल कण से भी दस-कुछ चरण और भीतर की चीज़ है, और वह हर एक सार की सबसे छोटी इकाई, स्पंदन की सबसे छोटी इकाई, जीवन-प्रकाश की सबसे छोटी इकाई है।

इसे स्पष्ट करने के लिए यह समझना होगा कि सब वस्तुएँ स्पंदन से बनी हैं, पर वैज्ञानिकों की दुनिया में पहले ही इस बात को समझने लगे लोग भी हैं, इसलिए ऐसे लोगों की शोध करने वाली चेतना पर हमारे अलग दल के काम करने से मिलने वाली झलक उन्हें मिलती रहे, तो आगे चलकर धीरे-धीरे यह स्पष्ट होता जाएगा। (अगली बार जारी)

 

 

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

इस ब्लॉग के संदेश, विषय के अनुसार एक पुस्तक-श्रृंखला में फिर से संजोए गए हैं।
यह श्रृंखला एक-एक खंड करके प्रकाशित की जाएगी।

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