जीवन-शिक्षा का महत्व (उत्तरार्ध)
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(पिछली बार से जारी)
★शिक्षा का महत्व
ऐसे बच्चों को देखकर, शायद कुछ वयस्कों को सामाजिक सफलता के प्रति उनकी निस्पृहता में कमी लगे, लेकिन वे उस महत्वपूर्ण बात को जानते हैं जिसे वयस्क व्यस्तता में न जाने कब पीछे छोड़ आए।
तो, वयस्क गलत शिक्षा थोपें भी, बच्चे किशोर बनने की प्रक्रिया में अंततः जीवन को जीवंत करने के महत्व को याद कर लेते हैं, लेकिन माता-पिता, शिक्षक और आसपास के अन्य वयस्कों को अब तक जीवन बढ़ाने के बारे में सीखने का अवसर बहुत नहीं मिला, इसलिए वह प्रेरणा भीतर बंद होकर न जाने कब मुहरबंद हो जाने के मामले बहुत हैं।
ऐसे समय, अगर बचपन में जीवन-शिक्षा मिली हो, तो उन्हें मार्ग से भटके बिना (कम दुःख के साथ) सीधे उस दिशा में ले जाया जा सकता है जिसमें उनका जीवन खिलता है।
वयस्कों में अब तक की सोच रची-बसी है, इसलिए उनके लिए खुद जानकर खुद अपना मार्गदर्शन करना महत्वपूर्ण है, लेकिन बच्चे शुद्ध सफ़ेद अवस्था में जन्म लेने के बाद अधिक समय नहीं बीता, इसलिए आगे किसी भी रंग में रँगने की संभावना अभी बहुत है, और वह संभावना अनंत कही जा सकती है।
असल में वयस्क भी, बस अपने जीवन के प्रकाश का मार्ग खोल लें, तो अपने भीतर निहित अनंत संभावनाओं का द्वार खोल सकते हैं।
आज बच्चों के साथ व्यवहार की बात है, इसलिए वयस्कों को खुद क्या करना चाहिए, इसके लिए दूसरी बातें पढ़ो।

अंत में दोहराऊँ, तो कितनी भी श्रेष्ठ आत्मा लेकर जन्मे बच्चों के लिए भी शिक्षा महत्वपूर्ण है।
कुछ दशक पहले भेड़ियों द्वारा पाले गए, मानवीयता बंद रहते हुए वयस्क बने और बाद के वर्षों में बहुत कष्ट झेले व्यक्ति की कहानी थी न?
इस तरह पालन-पोषण के परिवेश के अनुसार, कितनी भी श्रेष्ठ प्रतिभा वाला बच्चा भी बाद में कष्ट झेल सकता है। इसीलिए शिक्षा महत्वपूर्ण है।
मानव-जीवन का सार दिव्यता है, इसलिए वयस्कों के लिए बच्चों को यह सिखाना सबसे महत्वपूर्ण है।
इसके लिए वयस्कों को पहले खुद अपनी दिव्यता को विकसित करने वाली जीवन-शैली दिखानी होगी।
यही सीधे-सीधे पूरे समाज को सामंजस्य में लाकर पृथ्वी को पूर्ण सामंजस्य वाले शांत तारे तक ले जाने की नींव है। (समाप्त)






