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तारों के साथ संवाद के युग का द्वार खोलने के लिए

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

Voice of Space Brothers

सत्य के चरणों पर सही ढंग से क़दम बढ़ाने के लिए (पूर्वार्ध)

प्रकाशित अद्यतन

★भू-केंद्रित और सूर्य-केंद्रित सिद्धांत

बहुत पहले, पृथ्वी के लगभग सब लोग रात के आकाश में घूमते तारों और पूर्व के छोर से उगकर पश्चिम के छोर में डूबते सूर्य को देखते हुए मानते थे कि पृथ्वी ब्रह्मांड का केंद्र है।

फिर एक दिन समझ आया कि पृथ्वी ब्रह्मांड का केंद्र नहीं है।

तुम लोगों ने स्कूल में जो सीखा उसमें भू-केंद्रित और सूर्य-केंद्रित सिद्धांत हैं, है न।

पृथ्वी ही ब्रह्मांड का केंद्र है और सब तारे पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करते हैं, यह सिद्धांत, और ब्रह्मांड का केंद्र सूर्य है और पृथ्वी और दूसरे ग्रह घूर्णन करते हुए सूर्य की परिक्रमा करते हैं, यह सिद्धांत।

आज तो यह समझ आने लगा है कि तारों और ग्रहों से बनी सौर-मंडल आकाशगंगा जैसी अति-लघु आकाशगंगाएँ बहुत-सी होकर लघु आकाशगंगा बनाती हैं, वे लघु आकाशगंगाएँ इकट्ठा होकर मध्य-लघु आकाशगंगा बनती है, वे इकट्ठा होकर मध्य आकाशगंगा बनती है, फिर और बड़ी महा-आकाशगंगा, वे महा-आकाशगंगाएँ इकट्ठा होकर और बड़ी……, इस तरह केंद्रीय आकाशगंगा-तंत्र के निकट जाते हुए, अंत में पूरा महाब्रह्मांड एक केंद्रीय तारे की परिक्रमा कर रहा है, ब्रह्मांड का ऐसा पूरा रूप, अभी कुछ हद तक परिकल्पना के चरण में ही सही।

असल में उसके भीतर के तथ्य हैं, पर फ़िलहाल आज, अभी कहे गए भू-केंद्रित और सूर्य-केंद्रित सिद्धांत, और सूर्य-केंद्रित सिद्धांत के पैमाने को पूरे ब्रह्मांड तक ले जाने वाले नवीनतम सिद्धांत को लेकर, सत्य में भी मनोदशा के अनुसार अभ्यास के चरण होते हैं, इस बारे में समझाता हूँ।

यह पृथ्वी का सामान्य ज्ञान पूरी तरह बदलने जा रहे आज के युग के जीवन-ढंग को समझाने के लिए बिल्कुल उपयुक्त विषय है इसलिए उठा रहा हूँ; जैसे सूर्य-केंद्रित सिद्धांत न मान सकने वाला व्यक्ति यह बात नहीं समझ सकता कि आकाशगंगा-तंत्र एक के भीतर एक की संरचना में है और कई आकाशगंगा-तंत्र इकट्ठा होकर बड़ा आकाशगंगा-तंत्र बनते हैं, वैसे ही जो हृदय की गहराई से यह नहीं मान सकता कि उसका सार दिव्यता में है, उसे यह समझाना मेहनत का काम है, और और गहरा सत्य (पूरी मानवता दिव्य अस्तित्व है, यह सत्य) समझाकर देखो तो भी वह किसी भी तरह समझ नहीं पाता।

भू-केंद्रित से सूर्य-केंद्रित, सूर्य-केंद्रित से और महान सूर्य-केंद्रित सिद्धांत, इस तरह पृथ्वी की मानवता की ब्रह्मांड की समझ के अनुसार उसका पूरा रूप स्पष्ट रूप से समझ में आता जाता है; वैसे ही सत्य ऐसी चीज़ है कि उस व्यक्ति की मनोदशा के अनुसार सामग्री न बताई जाए तो वह काग़ज़ पर बनी मिठाई जैसा है, उस सत्य का अभ्यास करके भी वास्तविक बदलाव-विकास की अनुभूति आसानी से नहीं होती।

★गणित में बुनियाद से अनुप्रयोग तक के चरण

इसे बात बदलकर……, हाँ, जैसे गणित से समझाएँ, तो अंक न जानने वाले बच्चे को पहले 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10…… इस तरह अंकों का होना सिखाया जाता है, है न।

अंक याद हो जाएँ तो फिर जोड़-घटाव सिखाया जाता है, है न।

जोड़-घटाव याद हो जाए तो फिर गुणा-भाग सिखाया जाता है, है न।

तो “7 सेब वाली थैलियाँ 7 थीं। कुल सेबों की संख्या कितनी?” यह सवाल हल कराते समय, जोड़-घटाव के चरण का बच्चा “7 + 7 + 7 + 7 + 7 + 7 + 7 = 49” गणना करके उत्तर निकालता है।

गुणा-भाग सीख चुका बच्चा “7 × 7 = 49” इस तरह गुणा से जोड़ से भी आसानी से उत्तर निकाल सकता है, है न।

मनुष्य के जीवन-ढंग का सत्य भी इसी तरह बुनियाद से चरण-दर-चरण सीखकर अभ्यास करते जाओ, तो और आसानी से जीवन के मूल स्रोत के प्रकाश से सीधे जुड़कर भाग्य का सृजन सरलता से कर पाने लगते हो।

तुम लोगों में शायद ऐसे लोग हों जो पंजों पर खड़े होकर (जानकार बनकर) एकदम गहरे सत्य का अभ्यास करके बड़ा फल पाना चाहते हैं।

पर अभी बताए गणित के उदाहरण की तरह, अंक ही न जानो तो जोड़-घटाव हो ही नहीं सकता, और गुणा-भाग भी समझ नहीं आ सकता, उसी तरह सत्य की खोज और अभ्यास में भी चलने का क्रम, चरण होते हैं।

कल उस क्रम के बारे में चरण-दर-चरण बात करूँगा। (अगली बार जारी)

 

 

 

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

इस ब्लॉग के संदेश, विषय के अनुसार एक पुस्तक-श्रृंखला में फिर से संजोए गए हैं।
यह श्रृंखला एक-एक खंड करके प्रकाशित की जाएगी।

Angelusbell

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वीडियो एक-एक करके जारी किए जाएँगे।

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