दिव्य क्षेत्र के दृष्टिकोण को अपने भीतर धारण करने के लिए (8)
प्रकाशित अद्यतन
(पिछली बार से जारी)
★तुम अभी दिव्य क्षेत्र का दृष्टिकोण डाउनलोड कर रहे हो
भले ही आज तुम सतही चेतना में उसकी स्मृति बिल्कुल याद न कर पा रहे हो, यह निश्चित तथ्य है कि तुम बहुत पहले शुक्र ग्रह के आकाश-धरती में रहते थे।
वरना, किसी संयोग से इस वेबसाइट पर आ भी जाते, तो “क्या ऊँघती हुई बातें कर रहा है” सोचकर तुरंत ब्राउज़र का टैब बंद कर देते या किसी और साइट पर उड़ जाते।
तो जब शुक्र ग्रह का समाज अभी ठीक आज की पृथ्वी-संसार की स्थिति जैसा था, तब तुमने आकाश-धरती के आत्मिकीकरण को गति देने वाली जीवन-शैली में स्वयं भाग लेकर, शुक्र से जुड़े आकाश-धरती, वस्तु और मन के सब कुछ को दिव्य क्षेत्र के स्पंदन-लोक (दिव्यता के खिले हुए संसार) तक पहुँचाने का अनुभव पाया है।
इसीलिए तुम हमारी बातों में रुचि लेते हो, हमारी तरंग और गूँज से मेल खाते हो, और वेबसाइट नाम के अभिव्यक्ति-माध्यम के ज़रिए दोनों ओर से मन और मन का संवाद रोज़ दोहराते हो।
इस संवाद में तुम्हारा मन दिव्य क्षेत्र के स्पंदन को तेज़ी से सोख रहा है।
क्योंकि केवल हमारे शब्द पढ़ने भर से, तुम शब्दों से पहले गूँजने और बहने वाली कोतोदामा की तरंग को डाउनलोड कर रहे हो।

लेकिन इसके लिए एक शर्त है।
वह क्या है, तो वह यह कि तुम्हारा मन सारे संदेह झटककर भी चेतना का विकास करना सचमुच चाहता हो।
जब तुम्हारा मन इस शर्त पर खरा उतरता है, तो दिव्य क्षेत्र की तरंग के लगातार संपर्क में रहने से तुम अपने भीतर निहित दिव्यता की गूँज को बाहर निकालने तक पहुँच जाते हो।
तुम्हारे मन का हमारी बातें पढ़ना तुम्हारे भीतर आरंभ से निहित दिव्य क्षेत्र की गूँज को बाहर निकालने वाले प्राइमिंग-जल जैसा काम करता है, और जब यह बाहरी गूँज (तुम्हारी सतही चेतना द्वारा पहचाना गया सार्वभौमिक सत्य) और भीतरी गूँज (तुम्हारा सार यानी दिव्य चेतना, जीवन का प्रकाश) मिलकर एक हो जाती हैं, तब तुम दिव्य क्षेत्र के दृष्टिकोण को अपना बना सकते हो, और ईश्वर की आँख से आयामों की गहराई सहित संसार को देख सकते हो।
यह संवाद तुम्हारी ओर से देखें तो अभी शरीर की आँखों को न दिखने वाले मन के भीतर के संवाद (आत्मिक संवाद) तक सीमित है, लेकिन अंततः यह आँखों को दिखने वाले भौतिक संवाद में ऊपर उठ जाएगा।
और आखिरकार पृथ्वी-संसार के आयाम-स्पंदन को वहाँ तक आत्मिकीकृत करके जहाँ वह ब्रह्मांडीय समाज में शामिल हो सके, नाम और वास्तविकता दोनों में पूर्ण सामंजस्य वाले संसार में, पूरी पृथ्वी का आयामी उत्थान कराने से यह जुड़ता जाएगा। (अगली बार जारी)






