सच्चा अभी क्या है-2
प्रकाशित अद्यतन
सच्चा अभी क्या है
(पिछली बार से जारी) “सच्चा अभी” वह अवस्था है जिसमें “उज्ज्वल भविष्य बनाने वाली चेतना” पर आधारित विचार, वचन और व्यवहार को जिया जा रहा हो।
चेतना की दिशा अतीत की ओर रखकर अतीत को आधार बनाकर बातें सोचने वाले, या स्मृति पर आधारित विचार-ढर्रों के वश में जीने वाले लोग, सब अतीत में जी रहे हैं।
और प्रकट हुई घटनाओं या स्थितियों की केवल सतह पकड़कर, उनके अच्छे-बुरे या सही-ग़लत के बारे में “ऐसा नहीं, वैसा नहीं” सोचने वाले लोग भी, अतीत में जी रहे लोग कहे जा सकते हैं।
ऐसी मानसिक अवस्था वाले लोगों के विचार, वचन और व्यवहार से बनने वाला भविष्य, सब का सब अतीत का ही दोहराव बन जाता है।
समझ रहे हो?
यह एक ही जगह गोल-गोल घूमने वाली अवस्था है न।
इसलिए पहले जैसा ही भाग्य, हमेशा की तरह गढ़ते रहते हो।
बहुत से लोग यही दोहराते आए, इसलिए अब तक की पृथ्वी में बिल्कुल प्रगति नहीं हुई।
सोचकर तो देखो।
हज़ारों साल पहले के लोगों और आज के लोगों के सुख-दुख-क्रोध-हर्ष, भावनात्मक विचारों का ढंग बिल्कुल नहीं बदला।
और पीछे जाएँ तो, अटलांटिस और म्यू के युग से नहीं बदला, ऐसा भी कह सकते हैं।
सब अपने और दूसरों के जीवन को एक ही स्रोत वाले अस्तित्व के रूप में नहीं देखते।
और स्वयं और दूसरों को अलग करके देखने वाली भावनाओं से, अपनी सुविधा पर आधारित छीना-झपटी के खेल में, अनजाने में डूब जाते हैं।

आज भी पृथ्वी की बहुत सी मानवता, अपने क़रीबी अस्तित्वों के लाभ और सुविधा को ही प्राथमिकता देकर, “बस हमारा भला हो। बाक़ी का कुछ भी हो” ऐसी स्वार्थी भावनाओं में, अनजाने में बह जाती है न।
“सच्चे अभी” को जीने के लिए, ऐसी स्वार्थी भावनाओं को “परोपकारी मन” तक ऊपर उठाने की ज़रूरत है।
अभी कहा था न कि “सच्चा अभी” वह अवस्था है जिसमें “उज्ज्वल भविष्य बनाने वाली चेतना” पर आधारित विचार, वचन और व्यवहार को जिया जा रहा हो।
इसे परोपकारी मन पर आधारित “महान सामंजस्य की ओर उन्मुख मानसिक अवस्था” भी कह सकते हैं।
इसकी सबसे मूल बुनियाद है, कृतज्ञता के मन को अपनी चेतना में मानक के रूप में स्थापित करना।
आम तौर पर हमारी बातों में रुचि लेने वाले लोग, सज्जन मन के धनी होते हैं।
वे सज्जन लोग, प्रकृति के अस्तित्व और कार्य के प्रति कृतज्ञता का मन रखते हैं।
और सभी जीवित प्राणियों के प्रति कृतज्ञता का मन भी रखते हैं।
तो उन लोगों में कमी वाला बचा हुआ तत्व क्या है, क्या लगता है? (अगली बार जारी)






