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दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

दिव्यता का पुनर्जागरण

Divine Spark IN और मानवता का भविष्य-1

प्रकाशित अद्यतन

जागने लगी मानवता की गतिविधियाँ

पिछले लगभग आधे साल से ब्लॉग का अपडेट रुका हुआ था।

उस दौरान मैंने, बरसों से जिस व्यक्तिगत आध्यात्मिक खोज में लगा था, उसे कुछ समय के लिए एक ओर रखकर, वास्तविक संसार में लोगों से जुड़ाव के बीच, पवित्र चेतना का उपयोग करने वाले मानवीय आदान-प्रदान पर ध्यान लगाया।

ठोस रूप से कहें, तो Zoom और YouTube का उपयोग करके प्रार्थना-सभाओं और अध्ययन-सभाओं का आयोजन।

वे गतिविधियाँ मूल रूप से इस आधार पर हैं कि मनुष्य का सार पवित्र है, और साथ मिलकर Divine Spark IN बनाना सत्रों का केंद्र है।

उनमें इस ब्लॉग के पाठक भी हैं, और इस ब्लॉग से अलग समुदायों के लोग भी।

हम मनुष्यों की पवित्रता के पुनरुत्थान की गतिविधि अब विचारों, मान्यताओं, आस्था, सीमाओं, जातियों और भाषाओं की दीवारों को पार करके, वास्तविक संसार में फैलने लगी है।

“पवित्रता को फिर से जगाना”, इस विषय में न देशों के अंतर का कोई संबंध है, न जाति या भाषा के अंतर का।

पवित्र चेतना के प्रति जागने लगे हमारे बहुत से साथी जापान में हैं, यह तथ्य है, लेकिन असल में वे दुनिया भर में मौजूद हैं।

पहले जो केवल आदर्श था, कि हर देश और हर जाति हाथ में हाथ डालकर साथ मिलकर साझा भविष्य रचे, वह यथार्थ अब वास्तव में हमारी आँखों के सामने प्रकट हो रहा है।

यह Divine Spark IN के ज़रिए पहचाने जा सकने वाले एकत्व के संसार का फैलाव भी है।

Divine Spark IN मानवता की चेतना के विकास को बढ़ावा देता है, और साथ ही प्रकृति और सब जीवित प्राणियों के पुनर्जीवन में प्रभावी है।

यह IN, हममें से हर व्यक्ति चाहे कैसे भी विचार, मान्यताएँ या आस्था रखता हो, उसकी पृष्ठभूमि चाहे जैसी हो, कोई भी बना सकता है।

आगे चलकर ऐसा संसार आएगा जिसमें दुनिया भर के लोग, सब के सब, Divine Spark IN सीखेंगे, और किसी पर निर्भर हुए बिना अपनी पवित्रता को याद करके उसका उपयोग कर सकेंगे।

समानांतर फैलते कई भविष्य

जिन्हें अभी के चरण में बात ठीक से समझ न आए, वे भी आगे चलकर, जब पृथ्वी के मानसिक और भौतिक स्पंदन का आयामी उत्थान एक निश्चित चरण पार कर लेगा, और अब तक पर्दे के पीछे के नायकों के रूप में पृथ्वी-जगत की रक्षा करते आए पृथ्वी-जगत के देवगण और उच्च अस्तित्व, यानी ब्रह्मांडीय मानवता पृथ्वी की मानवता की आँखों के सामने प्रकट होंगे, तब उनके शब्दों के संपर्क में आकर, स्वाभाविक रूप से पवित्रता के विकास के महत्व को समझने लगेंगे।

इसलिए जो लोग वर्तमान चरण में ही यह बोध रखकर कि पवित्रता को फिर से जगाना सबसे महत्वपूर्ण है, चेतना के विकास में लगे हैं, वे इस पृथ्वी-जगत के लिए बहुत ही कीमती, दुर्लभ अस्तित्व कहे जा सकते हैं।

पृथ्वी का भविष्य अभी महत्वपूर्ण दोराहे पर आ पहुँचा है।

समानांतर फैलती कई भविष्य-रेखाओं में से कुछ कठिन राह वाली भी हो सकती हैं।

वह भविष्य है जिसमें चेतना के जागरण की ओर ध्यान देने में देर हो जाए।

और दूसरी भविष्य-रेखा में, मानवता आपस में हाथ में हाथ डालकर, सब अंतरों को पार करके, एक-दूसरे के अंतरों को स्वीकार करके, खूबियाँ एक साथ लाकर, पृथ्वी-जगत के पुनर्जीवन में पूरी शक्ति लगाती है।

मोटे तौर पर बाँटें तो ऊपर के दो भविष्यों में बँटते हैं, लेकिन पृथ्वी के लोग कौन-सा भविष्य चुनते हैं, यह इस पल जी रहे हममें से हर एक के चुनाव, निर्णय और अमल पर निर्भर है।

(अगली बार जारी)

 

 

 

दिव्य मानवता के रूप में जीने का मार्ग

इस ब्लॉग के संदेश, विषय के अनुसार एक पुस्तक-श्रृंखला में फिर से संजोए गए हैं।
यह श्रृंखला एक-एक खंड करके प्रकाशित की जाएगी।

Angelusbell

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वीडियो एक-एक करके जारी किए जाएँगे।

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