हर एक व्यक्ति स्वयं अपना मार्गदर्शक है (3)
प्रकाशित अद्यतन
(पिछली बार से जारी)
★अगर तुम खुद अपना मार्गदर्शन न करो तो आत्मा सचमुच विकसित नहीं होती
आज की पृथ्वी के स्पंदन-आयाम में, कुल मिलाकर, नकारात्मक विचारों का साकार होना तेज़ और सकारात्मक विचारों का साकार होना धीमा होने की प्रवृत्ति है।
हालाँकि तुम लोग, जो यह जानकर कि नकारात्मक अनुभूति (धारणा) मिट जाने के लिए नियत भ्रम (कर्म-विचार) है, प्रकाश की चेतना के पक्ष में खड़े होकर, आकाश में बहते बादलों को पकड़े बिना केवल देखने की तरह, उन्हें लगातार जीवन-प्रकाश में लौटा रहे हो, तुम्हारी चेतना उस सूक्ष्म लोक के स्पंदन-क्षेत्र से बाहर निकल चुकी है, इसलिए तुम्हारे लिए शुभ का साकार होना भी तेज़ है और तुम उस नियम के बाहर जी रहे हो।
तो बहुत से लोग ऐसी जीवन-शैली क्यों जी रहे हैं जिसमें नकारात्मक विचार जल्दी और सकारात्मक विचार देर से साकार होते हैं, क्योंकि “मनुष्य अपूर्ण अस्तित्व है” या “मनुष्य का स्वभाव ही निकम्मा है” जैसा मानव-दृष्टिकोण आधे से अधिक, नहीं, लगभग समस्त पृथ्वी की मानवता की सामान्य धारणा बन चुका है।
जो व्यक्ति अतीत की स्मृतियों पर आधारित विचारों की आदतों को ही अपना असली रूप मानकर जीता है, वह सकारात्मक विचार बनाए रखने की कोशिश करे तो भी, सामूहिक चेतना में जमा नकारात्मक विचारों में अनायास खिंच जाता है, बुरे भविष्य को आकर्षित करने वाले कारण बनने वाले नकारात्मक विचारों को चुन बैठता है, और उससे अवांछित वास्तविकता रच बैठता है।
इसीलिए कहता हूँ कि पहले चेतना का विकास पूरा कर चुके लोगों को अपने अस्तित्व और अपनी जीवन-शैली से पृथ्वी के आत्मिकीकरण को गति देनी होगी।
जिसने चेतना का विकास पूरा कर लिया है या कर रहा है, उसके केवल वहाँ मौजूद रहने भर से, कुछ भी किए बिना, जीवन के मूल स्रोत का महान प्रकाश रिसकर बाहर आता है।
और जब ऐसे लोग सक्रिय रूप से बोलते, लिखते और काम करते हैं, तो हर किसी के मन की गहराई में निहित जीवन के मूल स्रोत का महान प्रकाश उमड़ पड़ता है।
इस तरह, जिन क्षेत्रों और लोगों को उस प्रकाश का हिस्सा मिलता है, वहाँ से पृथ्वी का परिवेश धीरे-धीरे आत्मिकीकृत होता जाता है।
ऐसा होता जाए तो सबके लिए जीवन के सार को याद करना आसान होता जाता है, इसलिए जिन्होंने सार्वभौमिक सत्य की ओर देखना शुरू किया है, वे किसी के खींचे बिना, किसी के निर्देश के बिना, हर एक व्यक्ति अंतर्ज्ञान से सार्वभौमिक सत्य को याद करके जीवन की मूल स्वतंत्रता और सहजता को प्रकट करने वाली जीवन-शैली की ओर उन्मुख होने लगते हैं।

विशेष शक्तियों वाला सुपरमैन जैसा कोई उद्धारक किसी दिन अचानक प्रकट होकर सबके सामने “हैया!” करे, और विश्व की समस्त मानवता एकाएक दिव्यता का बोध पाए हुए सज्जन मनुष्य (आत्मा को धारण करने वाले) बन जाए, ऐसी सुविधाजनक बात एक सपने की कहानी है।
इस बिंदु पर, दुनिया भर के उन लोगों को भी जो अध्यात्मवाद की ओर मन लगाते हैं, मैं चाहता हूँ कि वे इसे स्पष्ट रूप से जान लें।
जो दूसरों का अधिकार छीनने की कोशिश करते हैं, वे कभी-कभी उद्धार चाहने वाले लोगों को मीठे सपने दिखाकर अपनी संतुष्टि पूरी करने की कोशिश कर रहे होते हैं, इसलिए सावधान रहना।
सच्चा मार्गदर्शक वह है जो हर एक की आत्मा के आत्मनिर्भर होने का मार्ग दिखाकर, उन लोगों की आत्मा को आत्मनिर्भर बनाने का तरीका सिखाता और समझाता है, कठोरता और कोमलता मिलाते हुए प्रोत्साहित करता है, उस जीवन-शैली का अभ्यास कराता है, और न जाने कब लोगों की चेतना को उस दिव्य क्षेत्र के स्पंदन-लोक तक गहरा कर देता है जहाँ आत्मा आत्मनिर्भर हो चुकी होती है।
और इसके उलट, मानवता का हर एक व्यक्ति, अगर वह खुद अपना मार्गदर्शन न करे, तो उसकी आत्मा सचमुच विकसित नहीं होती।
क्योंकि केवल दूसरों पर निर्भर रहने से आत्मा की शक्ति नहीं बनती। (अगली बार जारी)






