सही घड़ी
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★सत्य के प्रति जागने की सही घड़ी
हर मनुष्य के लिए सत्य के प्रति जागने की एक सही घड़ी होती है।
इसलिए अभी का तुम भले ही सत्य को याद करके, उसके अभ्यास के नतीजे के रूप में कष्ट-रहित मनोदशा में हो, अपने जैसी बात दूसरों पर ज़बरदस्ती थोपना या धमकी की तरह बाध्य करना नहीं चाहिए।
हर व्यक्ति के लिए सत्य के प्रति जागने का अपना समय है।
जैसे चेरी का पेड़ वसंत आने पर खिलता है, या हाइड्रेंजिया के फूल गर्मी की शुरुआत में सुंदरता से खुलते हैं।
इसलिए जैसे पौधों को पानी और धूप देते हैं, वैसे दूसरों के मिशन की पूर्ति की प्रार्थना करना अच्छा है, पर सत्य को ज़बरदस्ती थोपना अच्छा नहीं।
क्योंकि ऐसा कर्म हर व्यक्ति के जीवन के फूल को कुचलकर, खिलने के समय को देर करा देना भी बनता है।

★तुम्हारा करने का काम
वह कर्म चाहे कितना भी उस व्यक्ति के भले के लिए हो, चाहे पृथ्वी के भविष्य की चिंता के कारण हो, सत्य थोपना सत्य के अनुरूप न होने वाला असत्य का कर्म बनता है; इसलिए तुम्हारा करने का काम बस और बस, अपने को अनुशासित करके अपने में सत्य प्रकट करना ही है।
तुम बस सूर्य की तरह चमक बिखेरते रहो, इतना ही काफ़ी है।
तुम बस धरती की तरह ज़मीन के जीवों को पालते हुए देखते रहो, इतना ही काफ़ी है।
तुम उन सबके भीतर मौजूद दिव्यता के प्रति, उनकी जगह खड़े होकर कृतज्ञता अर्पित करो, इतना ही काफ़ी है।
क्योंकि बाक़ी सब कुछ हर व्यक्ति के संरक्षक देवता और आत्माएँ अच्छी दिशा में ले जाएँगे।






