स्त्री-ऊर्जा और पुरुष-ऊर्जा को एक करने के लिए (उत्तरार्ध)
प्रकाशित अद्यतन
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(पिछली बार से जारी)
★अपनी ख़ूबियों को चरम तक ले जाओ

इस तरह, हर किसी में ख़ूबियाँ भी हैं और कमियाँ भी, और उनमें हर एक व्यक्ति का अपनी ख़ूबियों को बढ़ाते जाना ही, कमियों को हल्का करके मिटाने का सबसे बड़ा रहस्य है।
लेकिन ज़्यादातर मामलों में, सब लोग कमियाँ मिटाने, दोष हटाने, उनका कुछ करने की कोशिश में, चेतना की ऊर्जा को बिल्कुल उलटी दिशा में लगा देते हैं।
मनुष्य की कल्पना से होने वाला सृजन, चेतना की ऊर्जा को किस दिशा और कोण में छोड़ा जा रहा है, किस आयाम पर टिककर छोड़ा जा रहा है, इसके अनुसार ज़मीन-आसमान जितने अलग परिणाम रचता है।
केवल दोषों और कमियों पर ही ध्यान लगाते रहो, तो उलटे वे बड़े हो जाते हैं, और आसक्ति गहरी हो जाती है।
इसलिए यह समझ गए, तो इसी क्षण से अपनी अच्छी बातों को जितना हो सके बढ़ाने का प्रयास करो।
बढ़ाने को गहरा करना भी कहा जा सकता है, फैलाना भी, और चरम तक ले जाना भी।
अपनी ख़ूबियों को चरम तक ले जाने का ध्यान रखकर जीते-जीते, कमियाँ फीकी पड़ती जाती हैं, और आगे चलकर बिना कोई निशान छोड़े मिट जाती हैं।
यह समझ आ जाए, तो जीना कितना आसान हो जाता है, इसका अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता।
ठीक है?
केवल अच्छी बातों पर नज़र रखकर, उन्हें सचेत होकर विचार, वचन और कर्म में प्रकट करते जाओ, बस इतना काफ़ी है।
इसका अर्थ है कि ख़ूबियों की गहराई में ही वह भरा हुआ है, जो अभी तुम्हें अपने में कम लगता है, जिसकी कमी लगती है।
★स्त्री-पुरुष ऊर्जा का एकीकरण यानी अपने भीतर के ईश्वर को चरम तक ले जाना

“मैं साहसहीन व्यक्ति हूँ। कमज़ोर हूँ”, ऐसी आत्म-पहचान रखने वाला व्यक्ति, उस कमज़ोरी के पीछे की कोमलता और परवाह पर नज़र करे, बस।
उसे चरम तक ले जाने से, सच्चा साहस और शक्ति सतह पर आने लगते हैं।
सच में कोमल व्यक्ति, अपने स्वार्थ पर एक नज़र डाले बिना, दूसरों के लिए अपना जीवन अर्पित कर सकता है, है न।
अगर अभी वह नहीं हो पाता, तो वह अधूरी कोमलता है, इसलिए उस कोमलता को और भी, और भी चरम तक ले जाते जाओ।
पुरुष-ऊर्जा का सार भी, और स्त्री-ऊर्जा का सार भी, अंतिम गहराई में दिव्य प्रेम नाम के, सबको गले लगाने वाले प्रेम तक पहुँचते हैं।
यही स्त्री-पुरुष ऊर्जा को एक कर चुके व्यक्ति का रूप है।
भौतिक शरीर की संरचना में, पुरुष और स्त्री के काम बिल्कुल अलग हैं, और भूमिकाओं में भी वे विपरीत छोर वाले रूप दिखाते हैं, लेकिन अगर हर एक व्यक्ति अपने भीतर के ईश्वर को चरम तक ले जाए, तो वहाँ न पुरुष है न स्त्री, बल्कि दोनों के मिलन वाली दिव्यता है।
इसलिए, अपने स्वभाव को अच्छी तरह परखकर, मूल रूप से मौजूद ख़ूबियों को बढ़ाने वाला व्यवहार करो।
मतलब, किसी से भी गहराई से अपने को स्वीकार करके, अपनी अच्छाइयों का पूरा उपयोग करो, बस।
इतनी कठिन बात तो नहीं है न।
जिसमें अच्छे हो उसे चरम तक ले जाना है, बस।
जो यह कर पाया, वही पुरुष-ऊर्जा और स्त्री-ऊर्जा का संतुलन पा चुका व्यक्ति है।
इस साल 2019 में, तुम लोगों में से हर एक, भीतर की पुरुष-ऊर्जा और स्त्री-ऊर्जा का मिलन करके, दोनों के एकीकरण की ओर बढ़ेगा।
उसमें बाधा डालने वाला कुछ भी नहीं है।
अपने ही आदतन विचारों के सिवा। (समाप्त)






